आरोपित रम्मो उर्फ रामवीर कुछ इस तरह हुआ  अरैस्ट

आरोपित रम्मो उर्फ रामवीर कुछ इस तरह हुआ  अरैस्ट

जिला और सत्र कोर्ट के एक बाबू (लिपिक) का फर्जीवाड़ा का मुद्दा सामने आया है। जिसमें पहले वह छोटे-छोटे मामलों में फर्जी दस्तावेजों पर कारागार से रिहाई के आदेश जारी कर देता था। फिर उसने कुछ बड़ी धाराओं के मामलों में भी रिहाई का आदेश जारी कर जुर्माने की राशि

हड़पना शुरू कर दी। वहीं, इस लिपिक को पुलिस ने बीते सोमवार रात शिवपुरी-गुना के बीच रास्ते से अरैस्ट कर लिया हैं। हाल में उससे पूछताछ की जा रही है। लिपिक पर अब तक 1.21 लाख रुपये के गबन का मुद्दा सामने आ चुका है। उससे पूछताछ जारी है। इस मुद्दे पर बुधवार यानी आज उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।

आरोपित रम्मो उर्फ रामवीर को 25 मई 2019 को अरैस्ट कर कारागार भेजा गया था। उसकी गिरफ्तारी से लेकर 14 जून 2019 तक प्रकरण पीठासीन ऑफिसर के समक्ष पेश ही नहीं किया गया। इसके पश्चात् 30 नवंबर 2019 को पीठासीन ऑफिसर के समक्ष प्रकरण पेश किया गया। आरोपित पेश नहीं हुआ न ही कारागार वारंट मिला था। इसके पश्चात् 10 दिसंबर 2019 को भी यही स्थिति रही थी।

इस मुद्दा पर 13 जनवरी 2020 को न्यायालय ने कारागार प्रशासन से इस विषय में स्थिति स्पष्ट करने के लिए बोला गया हैं। वहीं ,13 फरवरी को कारागार से आरोपित के विषय में एक रिहाई आदेश की प्रति न्यायालय में पेश की गई। जिसमें रिहाई आदेश का बारीकी से अध्ययन करने पर पता लगा कि उस पर पीठासीन ऑफिसर (जज) के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। रिहाई आदेश की हस्तलिपी तत्कालीन प्रवर्तन लिपिक पंकज टेगौर की होने की पुष्टि होने पर मुद्दा सामने आया हैं। इसके पश्चात् पुलिस ने मुद्दा दायर कर लिया हैं। लिपिक पंकज ऐसा फर्जीवाड़ा कई बार कर पहले भी कर चुका है।

पुलिस लगातार आरोपित की तलाश में जुटी हुई थी। उसके मोबाइल से लेकर एटीएम तक पुलिस के सर्विलांस पर थे। इसी दौरान सोमवार शाम को उसकी लोकेशन शिवपुरी के पास मिली। जब सायबर टीम की मदद से इंदरगंज थाना प्रभारी पंकज त्यागी ने टीम के साथ घेराबंदी कर दी। उसे शिवपुरी-गुना के बीच हाईवे से अरैस्ट कर लिया गया। उसने फर्जी दस्तावेज पर रिहाई आदेश की बात भी कबूल कर ली हैं।