योगी सरकार के मंत्री ने ही लखनऊ में कोरोना हालात पर उठाए सवाल, CM पृथक-वास में

योगी सरकार के मंत्री ने ही लखनऊ में कोरोना हालात पर उठाए सवाल, CM पृथक-वास में

उत्तर प्रदेश सरकार के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य महकमे के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं की चिंताजनक हालत की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि अगर हालात में जल्दी सुधार नहीं हुआ तो कोविड-19 रोकथाम के लिए लखनऊ में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है। उधर, समाजवादी पार्टी ने मंत्री के पत्र बहाने कोरोना प्रबंधन में अव्यवस्था के लिए पूरी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कानून मंत्री ब्रजेश पाठक का सोमवार को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को भेजा गया कथित पत्र मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पत्र के भेजे जाने के बारे में जब पाठक से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक गोपनीय पत्र भेजा है।’’ लेकिन उन्होंने पत्र में क्या लिखा है इस बारे कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में पाठक ने लिखा है कि ‘‘अगर कोविड-19 जनित परिस्थितियों को शीघ्र नियंत्रित नहीं किया गया तो हमें रोकथाम के लिए लखनऊ में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।‘‘ 

उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘‘अत्यंत कष्ट के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि वर्तमान समय में लखनऊ जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अत्यंत ङ्क्षचताजनक है। विगत एक सप्ताह से हमारे पास पूरे लखनऊ जनपद से सैकड़ों फोन आ रहे हैं, जिनको हम समुचित इलाज नहीं दे पा रहे हैं।‘‘ पत्र में लिखा है,‘‘मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में फोन करने पर बहुधा फोन का उत्तर नहीं मिलता। इसकी शिकायत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से और अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य से करने के उपरान्त फोन तो उठता है किन्तु सकारात्मक कार्य नहीं होता।‘’उन्होंने आगे लिखा है कि मरीज की जांच रिपोर्ट मिलने में चार से सात दिन का समय लग रहा है, एंबुलेंस नहीं मिल रही है। 

उन्होंने यह शिकायत की है,‘‘आज मेरे विधानसभा क्षेत्र के पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ योगेश प्रवीण की अचानक तबियत बिगड़ गई। इसकी सूचना मिलने पर मैंने स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से फोन पर बात की और उन्हें तत्काल एंबुलेंस व चिकित्सा मुहैया कराने का अनुरोध किया, किंतु खेद का विषय है कि कई घंटों बाद भी उन्हें एंबुलेंस नहीं मिली और समय से इलाज नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु हो गयी।‘‘ 

सोशल मीडिया पर कानून मंत्री का पत्र वायरल होने के बाद विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा,‘‘उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और यह बात सिर्फ हम नहीं उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री भी कह रहे हैं।’’ भदौरिया ने कहा कि अधिकारी जब कानून मंत्री का फोन नहीं उठा रहे हैं तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए ट्वीट किया,‘‘उप्र में कोरोना से जो हाहाकार मचा है उसके लिए भाजपा सरकार को जवाब देना होगा कि उसने कोरोना पर नियंत्रण पाने का झूठा ढिंढोरा क्यों पीटा।‘‘ 

मुख्यमंत्री योगी पृथक-वास में गए
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दफ्तर के कुछ अधिकारियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एहतियातन पृथक-वास में रह रहे हैं। योगी ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'मेरे कार्यालय के कुछ अधिकारी कोरोना से संक्रमित हुए हैं। यह अधिकारी मेरे संपर्क में रहे हैं, अत: मैंने एहतियातन अपने को आइसोलेट कर लिया है एवं सभी कार्य वर्चुअली प्रारम्भ कर रहा हूं।' गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल, विशेष कार्याधिकारी अभिषेक कौशिक, विशेष सचिव अमित सिंह तथा कुछ अन्य कर्मचारी कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं।  


इलाज में ढिलाई पर सीएम योगी बहुत नाराज, कई डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी

इलाज में ढिलाई पर सीएम योगी बहुत नाराज, कई डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी

कानपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार प्रबंधन को लेकर सीएम ने असंतोष जताया है. उन्होंने सीनियर डॉक्टरों के राउंड नहीं लेने, मरीजों और तीमारदारों के साथ ठीक व्यवहार नहीं करने पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को फटकार लगाई है. जिलाधिकारी ने देर रात प्राचार्य प्रो आरबी कमल को नोटिस दी है. 24 घंटे में स्थिति सुधारने को बोला है.

मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अफसरों से चर्चा कर रहे थे. उन्होंने मौतों को लेकर अफसरों पर तल्खी जाहिर की. दरअसल मुख्यमंत्री को स्रोतों से यह जानकारी मिल रही है कि कोविड मरीजों की देखरेख में ढिलाई हो रही है. जूनियर डॉक्टरों के सहारे उपचार चल रहा है. कोविड मरीजों को नहीं देख रहे हैं. मौतों का ब्योरा पोर्टल पर देर से दर्ज हो रहा है. इसे लेकर सीएम ने नाराजगी जताई है. उसी कड़ी में जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने रात नोटिस जारी करके सभी बिंदुओं पर मेडिकल कॉलेज का ध्यान दिलाया है.

एक दर्जन डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी 
कानपुर जिलाधिकारी से नोटिस मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन के ऑफिसर हरकत में आए. प्राचार्य प्रो आरबी कमल ने एक दर्जन डॉक्टरों और कर्मचारियों को डाटा फीडिंग में ढिलाई के मुद्दे में नोटिस दी है. प्राचार्य के अनुसार कि डीएम के नोटिस के संज्ञान में उत्तरदायी डॉक्टरों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. अब दो डॉक्टर और दो कर्मचारी डाटा अपडेट करने के लिए 24 घंटे तैनात किए गए हैं.


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