जब 12 दिन तक चला टेस्ट मैच, फिर भी नहीं निकल पाया नतीजा

जब 12 दिन तक चला टेस्ट मैच, फिर भी नहीं निकल पाया नतीजा

 आमतौर पर टेस्ट क्रिकेट पांच दिनों का होता है। क्रिकेट प्रेमी ये भी जानते होंगे कि कुछ ही दशक पहले तक मुकाबला 6 दिन का होता था, लेकिन उसमें से एक दिन आराम मिलता था। वहीं, अगर आपको बताया जाए कि एक टेस्ट मैच 12 दिन तक चला तो आपको शायद हैरानी होगी, लेकिन ये सच है। दो विश्व युद्ध के दौरान टेस्ट क्रिकेट लंबे समय तक चलता था। एक बार एक टेस्ट मैच 12 दिनों तक चला था।

एक और हम जहां साउथैंप्टन में खेले जाने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल को छठे दिन ले जाने की बात कर रहे हैं। वहीं, एक मुकाबला 12 दिन तक चला था। ऐसे में कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी कि ये मैच छठे दिन चले। दरअसल, 12 दिन तक चलने वाला यह मुकाबला मार्च 1939 में दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच डर्बन के मैदान पर खेला गया था। रेस्ट डे और वॉशआउट के बाद यह मुकाबला 12 दिनों बाद ड्रॉ पर समाप्त हुआ।

यह मुकाबला टेस्ट सीरीज का पांचवां और अंतिम मैच था। इंग्लैंड इस सीरीज में 1-0 से आगे था और पांच मैचों के बाद भी नतीजा 1-0 पर ही अटका रहा। पहले दिन का खेल खत्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने दो विकेट पर 229 बनाए थे और दूसरे दिन उसने छह विकेट पर 423 रन बनाए थे। मैच का तीसरा दिन रविवार होने के कारण रेस्ट डे था, जबकि चौथे दिन दक्षिण अफ्रीका की पारी 530 रन पर सिमट गई। दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने जवाब में एक विकेट पर 35 रन बनाए थे।

पांचवें दिन इंग्लैंड ने सात विकेट पर 268 रन बनाए। इसके बाद मेहमान टीम की पहली पारी 316 रन पर ऑलआउट हुई और दक्षिण अफ्रीका को 214 रनों की बढ़त मिली। छठे दिन दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे सत्र तक तीन विकेट पर 193 रन बनाए और अपनी बढ़त को मजबूत किया। टीम की दूसरी पारी 481 रन पर ऑलआउट हुई और उसने इंग्लैंड को जीत के लिए 696 रनों का लक्ष्य दिया।

आठवें दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने एक विकेट पर 253 रन बनाए थे। नौंवें दिन का खेल बारिश के कारण पूरी तरह धुल गया। 10वां दिन रविवार होने के कारण रेस्ट डे रहा। 11वें दिन इंग्लैंड ने तीन विकेट पर 496 रन बनाए थे और उसे जीत के लिए और 200 रनों की आवश्यकता थी। यह वो दिन था जब यह इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच किंग्स्टन में 1930 में खेले गए मैच को पीछे छोड़ते हुए यह सबसे लंबा चलने वाला मुकाबला बना।

इंग्लैंड की टीम को ट्रेन से केपटाउन जाना था जहां उसे बोट पकड़नी थी जिसके कारण 12वें दिन को मैच का अंतिम दिन घोषित किया गया, क्योंकि इसी दिन शाम को इंग्लैंड के खिलाड़ियों को रवाना होना था। आखिरी दिन इंग्लैंड ने चायकाल तक पांच विकेट पर 654 रन बनाए थे और उसे जीत के लिए महज 42 रनों की जरूरत थी, जबकि उसके पांच विकेट शेष थे, लेकिन इसके बाद जोरदार बारिश होने लगी और मुकाबला आगे नहीं कराया जा सका।


इस महिला एथलीट का चौंकाने वाला खुलासा! 'कंडोम की सहायता से जीता ओलंपिक मेडल'

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टोक्यो: ऑस्ट्रेलिया के लिए ओलंपिक में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतने का कारनामा कर चुकीं एथलीट जेसिका फॉक्स ने अपनी सफलता का दंग कर देने वाला राज बताया है जेसिका फॉक्स के अनुसार उन्होंने कंडोम की सहायता से ओलंपिक मेडल जीता था जेसिका फॉक्स की बात करें तो वह जापान में जारी टोक्यो ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुकी हैं

मेडल जीतने के लिए किया कंडोम का इस्तेमाल 

जेसिका फॉक्स कैनो स्लेलम में इस्तेमाल होने वाले कायक बोट (कश्ती) को ठीक करने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करती हैं जेसिका फॉक्स ने बताया कि मुझे आशा है कि आप लोग शायद नहीं जानते होंगे कि एक कॉन्डम को कायक बोट्स को रिपेयर के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है '

वायरल हो रहा वीडियो 

जेसिका फॉक्स ने बताया कि ये कार्बन को बहुत ज्यादा स्मूद फिनिश देता है फॉक्स का ये वीडियो फैंस के बीच बहुत ज्यादा वायरल हो रहा है और इस घटना के बाद वे ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं 27 वर्ष की फॉक्स सिडनी से ताल्लुक रखती हैं और वे  टोक्यो ओलंपिक के कैनोन स्लेलम इवेंट में 106.73 टाइम के साथ तीसरे जगह पर रहीं

फॉक्स का ओलंपिक खेलों में रिकॉर्ड शानदार 

फॉक्स इस ओलंपिक्स में गोल्ड की आशा लगा रही थी यही कारण है कि वे इस इवेंट के समाप्त होने के बाद बहुत ज्यादा अधिक निराश नजर आई थीं हालांकि उनका एक इवेंट अभी बचा हुआ है हालांकि वे इस रेस में वे फास्टेस्ट थीं, लेकिन टाइम पेनल्टी के चलते उन्हें तीसरे जगह से संतोष करना पड़ा   बताते चलें कि फॉक्स तीन बार की कैनोन स्लेलम K1 वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी हैं उन्होंने वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक्स में सिल्वर पदक हासिल किया था   इसके अतिरिक्त वे वर्ष 2016 में हुए रियो ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज जीतने में सफल रही थीं