योगी आदित्यनाथ ने नोडल अधिकारियों के साथ मीटिंग में दिखाए ये कड़े तेवर

 योगी आदित्यनाथ ने नोडल अधिकारियों के साथ मीटिंग में दिखाए ये कड़े तेवर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75 जिलों का दौरा पूरा करने वाले नोडल अधिकारियों के साथ मीटिंग में कड़े तेवर दिखाए. उन्होंने बोला कि आईजीआरएस पोर्टल व सीएम हेल्पलाइन पर औनलाइन आने वाली शिकायतों का निस्तारण महज औपचारिकता के रूप में न करें. उन्हें गंभीरता से लेकर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुसार समस्या का हल निकाला जाए क्योंकि आम आदमी कभी झूठ नहीं बोलता है.

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सीएम योगी ने लालबहादुर शास्त्री भवन (एनेक्सी) के कैबिनेट हॉल में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिवों के साथ मीटिंग में उन्हें आवंटित जिलों के जून-जुलाई के निरीक्षण की समीक्षा की. इस दौरान सीएम ने कहा, शिकायतों के निस्तारण का सत्यापन मैं खुद औनलाइन करूंगा. शिकायत करने वालों से उनकी संतुष्टि की जानकारी लूंगा. फर्जी निस्तारण होने पर कार्रवाई भी औनलाइन करूंगा.

सीएम ने बोला कि नोडल ऑफिसर जिलों में निरीक्षण के साथ ही आम जनता व जनप्रतिनिधियों से मिलें. उनसे फीडबैक लेकर प्रभावी कार्रवाई करें. जिलों में समीक्षा मीटिंग के साथ ही योजनाओं का भौतिक सत्यापन व निरीक्षण गंभीरता से करें. रिपोर्ट बनाते समय कोई संकोच न करें.

सीएम ने बोला कि सभी ऑफिसर अपने-अपने विभाग से संबंधित शिकायतों को लेकर आईजीआरएस पोर्टल व सीएम हेल्पलाइन की हर महीने समीक्षा करें. जब ऑफिसर जिलों के निरीक्षण पर जाएं तो सुनिश्चित करें कि मौके पर शिकायतों का निस्तारण होना चाहिए.

केंद्रीय बजट का अध्ययन कर बनाएं कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बोला कि वे केंद्रीय बजट का अध्ययन कर उसी के आधार पर प्रदेश की जनता की बेहतरी के लिए अपने विभाग की कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ अपने-अपने विभाग के मंत्री को लेकर दिल्ली में केंद्रीय अधिकारियों के साथ बैठक करें.

सभी ऑफिसर 10 से 15 दिन में अपने-अपने विभागों की कार्ययोजना बनाकर केन्द्र सरकार के अधिकारियों को सौंप दें. कार्ययोजना की प्रतिलिपि सीएम ऑफिस को मुहैया करवाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर वह खुद केंद्रीय मंत्रियों और पीएम से बात कर सकें.

अपने विभाग के बजट की हर महीने करें समीक्षा
योगी ने बोला कि सभी ऑफिसर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर विभागीय और जिला स्तर पर प्लानिंग करें. अपने-अपने विभाग के बजट की हर महीने समीक्षा करें. देखें कि विभाग के लिए स्वीकृत राशि कितनी खर्च हुई है व कितनी बची रह गई है.