जब शेर करे आप पर हमला तो करे ये काम, जानिए ऐसे...

जब शेर करे आप पर हमला तो करे ये काम,  जानिए ऐसे...

यदि आप किसी जंगल जा रहे हैं तो यह जानना आपके लिए महत्वपूर्ण है. शेर, बाघ या तेंदुआ मिले तो भागे नहीं व बिना पीठ घुमाए धीरे-धीरे पीछे की ओर लौटें.

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अगर वह आपको देख लेता है तो चुपचाप खड़े होकर सहज भाव से आंखें मिलाएं, घूरें नहीं. ऐसे में वह वहां से चला जाएगा. अगर हमलावर हो तो उसकी नाक पर वार करें. ऐसा करने पर वह डरकर भाग जाएगा. ऐसे ही कुछ रोमांचक बातों की ट्रेनिंग दी जा रही है वेटनरी के विद्यार्थियों को.

ये बातें किसी कहानी का भाग नहीं, बल्कि यह वाइल्ड जीवन मेडिसिन एंड मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम का भाग हैं. इन दिनों कानपुर चिड़ियाघर में मथुरा वेटनरी यूनिवर्सिटी के 40 छात्र-छात्राएं वन्य जीवों के स्वभाव, मानव को लेकर उनकी प्रवृति, रेस्क्यू के ढंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं. इसमें उन्हें बताया जा रहा है कि कैसे वन्य जीव विशेषज्ञ खतरनाक जानवरों को रेस्क्यू के दौरान पकड़ते हैं. पशु चिकित्सा ऑफिसर डॉ। आरके सिंह इन विद्यार्थियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

जंगली जीव इंसान से छह गुना ज्यादा डरपोक
डॉ। आरके सिंह का बोलना है कि हर जानवर की भिन्न-भिन्न प्रवृति होती है पर एक बात समान है कि जंगली जीव इनसान से छह गुना अधिक डरपोक होते हैं.आपात स्थिति में आदमी थोड़ी हौसला व संयम रखे तो हिंसक पशुओं से सरलता से बच सकता है. जैसे बंदर की आंख में आंख मिलाया तो वह हमला कर सकता है.

मगरमच्छ से सीखें, संयम व धैर्य की ताकत
प्रशिक्षक डॉ। आरके सिंह, यूसी श्रीवास्तव व डॉ। नासिर ने बताया कि मगरमच्छ से कई घंटे स्थिर रह सकता है, जब उसे विश्वास हो जाता है कि शिकार उसकी मजबूत पकड़ में है तभी हमला करता है. किसी तालाब, नदी किनारे यदि मगरमच्छ पकड़ ले तो उसकी आंख पर तेज हमला करें. इससे उसकी पकड़ निर्बल हो जाएगी व सरलता से बचा जा सकता है. मगरमच्छ के गले में फ्लैप होता है. यदि उसने किसी का हाथ जबड़ों में फंसा लिया हो तो कोशिश करें कि गले के अंदर हाथ से जबड़े की झिल्ली पकड़ने का कोशिश करते रहें. उसे इतना दर्द होगा कि कराह उठेगा व निश्चित ही छोड़ देगा.

शेर चार वजहों से हमला करता है
डॉ। आरके सिंह ने बताया कि शेर, बाघ और तेंदुआ चार खास वजहों से हमला करते हैं. पहला जब मादा अपने बच्चों के साथ हो, दूसरा अपने असर क्षेत्र में किसीआदमी के कब्ज़ा की स्थिति में, तीसरा सहवास के समय दखल व चौथा यदि वह आदमखोर है. उन्होंने बताया कि सबसे अधिक मुद्दे असर क्षेत्र में हस्तक्षेप के ही सामने आए हैं. जब भी इन जीवों को लगता है कि उसके अधिकार वाले क्षेत्र में कोई दूसरा कब्ज़ा कर रहा है या करने वाला है तभी हमला करते हैं. यदि ऐसे जीव सामने हों तो घूरने के बजाय सहज भाव से देखें. अगर आप भागे तो वह शिकार समझ लेगा व बैठ गए तो दूसरा जानवर समझेगा. बेहतर है कि उसे देखते हुए बगैर मुड़े पीछे की ओर धीरे-धीरे बढ़ें. यही वजह है कि सुन्दरवन में जाने वाले लोकल ग्रामीण सिर के पीछे मुखौटा लगाते हैं.

बंदर से न मिलाए आंखें अन्यथा करेगा हमला
हम अक्सर बंदर को देखकर उसे भगाने में उससे आंखें मिलाकर उसे उसके अंदाज में देखने लगते हैं. ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर आपने आंख में आंख मिलाकर देखा तो वह 100 प्रतिशत हमला कर देगा. इसी लिए देश और शहर में अधिकांश ऐसे केस सामने आते हैं कि बंदर ने हमला कर दिया.

सांप के काटने पर घबराएं नहीं, बल्कि मुस्कुराएं
सांप के काटने पर जहर नहीं फैलता व न मृत्यु होती है. कोई सांप काट ले तो मुस्कुराना प्रारम्भ कर दें व भागें बिल्कुल नहीं. इससे ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ेगा व जहर धीमे फैलेगा. डॉ। नासिर ने बताया कि संसार में मात्र कोबरा, रसैलवाइपर, सॉस्केल्ड वाइपर, करैथ, पिटवाइपर व किंग कोबरा में ही जहर होता है. जहरीले सांप के काटने की पहचान यही है वहां दो दांतों के निशान बन जाएंगे.

रेस्क्यू के दौरान यह ध्यान रखें
1- विषखापर में जहर नहीं होता, इसलिए भ्रांति न पाले.
2- अपने देश में जहर वाली छिपकली नहीं पाई जाती है.
3- हाथी हमला करे तो ऊंचाई पर न जाएं व न ही पेड़ पर चढ़ें. हो सके तो तेजी से ढलान की ओर भागें, क्योंकि ढलान पर हाथी संतुलन नहीं बना पाता है.
4- सांपों के इलाकों में लकड़ी का टुकड़ा जमीन पर ठोंकते चलें तो सांप भाग जाएंगे.