गंगा दशहरा के पावन पर्व पर काशी के घाटों पर हजारों आस्थावानों ने इतनी डुबकी लगाने का विधान किया पूरा

गंगा दशहरा के पावन पर्व पर काशी के घाटों पर हजारों आस्थावानों ने इतनी डुबकी लगाने का विधान किया पूरा

गंगा दशहरा के पावन पर्व जेष्ठ शुक्ल दशमी को काशी के घाटों पर हजारों आस्थावानों ने गंगा में डुबकी लगाई. गंगा दशहरा पर गंगा स्नान का मुख्य महात्म काशी के दशाश्वमेध घाट पर है. ऐसे में स्नान करने वालों की सर्वाधिक भीड़ भी यही रही. ब्रह्म मुहूर्त में प्रारम्भ हुआ स्नान का क्रम पूर्वाह्न 11:00 बजे के बाद तक जारी रहा. सभी ने दशहरा पर गंगा में 10 डुबकी लगाने का विधान पूरा किया.

इससे पूर्व प्रातः अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज के तत्वावधान में शास्त्रार्थ महाविद्यालय के बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का पूजन एवं अर्चन किया तदुपरांत पंडित मनोज शास्त्री के आचार्यत्व में केसर जल एवं दूध से अभिषेक किया. प्रारंभ में ब्राह्मणों ने सस्वर मंगलाचरण किया. अभिषेक के पश्चात गंगासेवी एवं गंगोत्री सेवा समिति के निर्माणकर्ता अध्यक्ष पंडित किशोरी रमण दुबे "बाबू महाराज' को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया.

कार्यक्रम संयोजक पवन शुक्ला ने बोला कि सनातन धर्म में गंगा केवल एक नदी ही नहीं अपितु देवी व माता के रूप में पूजी गई हैं. गंगा हमारी आस्था का केन्द्र एवं देश गौरव भी हैं.जरूरत है कि हम गंगा को मातृभाव से पूजते हुए इनका संरक्षण करें. वर्तमान में हमें भी भागीरथ कोशिश करना चाहिए तथा जनमानस में इसके लिए जागरूकता भी होनी चाहिए. गंगा दशहरा के पावन पर्व पर मां गंगा का पृथ्वी पर प्रादुर्भाव हुआ. आज के दिन स्नान एवं दान का विशेष महत्व है. प्रोग्राम में प्रमुख रूप में पवन शुक्ला,विष्णुरत्न पांडेय, विशाल औढेंकर,राकेश तिवारी,नवीन कसेरा,शीतांशु शास्त्री,नरेंद्र बाजपेयी, किशोर बनारसी,राजेश गौतम,भोला एवं प्रमोद आदि शामिल थे .