संगीत इंस्टीट्यूट कलाधाम की शाखा कश्मीर में भी खोलेगा यह गायक

 संगीत इंस्टीट्यूट कलाधाम की शाखा कश्मीर में भी खोलेगा यह गायक

जाने-माने गायक कैलाश खेर ने बोला है कि 70 वर्ष तक हमने दंश झेला है, अब लग रहा है कि वास्तव में आजाद हैं. अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद ठीक अर्थ में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही देश दिख रहा है. उनकी हार्दिक ख़्वाहिश है कि सबकुछ अच्छा ठाक रहा तो वे अपने संगीत इंस्टीट्यूट कलाधाम की शाखा कश्मीर में भी खोलेंगे. बस शिव की कृपा का इंतजार है.

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खेर यहां हर-हर महादेव संघ के प्रोग्राम से पहले संवाददाताओं से होटल रमाडा में वार्ता कर रहे थे. कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले खेर ने बोला कि पहले कश्मीर में दो झंडे लगाते थे, अब एक झंडा दिख रहा. देश चलाने के लिए दो बुद्धीजीवी बैठे हैं, जो पूर्वज नहीं कर सके वे दोनों ने कर दिखाया.

सात पीढ़ी पहले हुए थे विस्थापित
खेर ने बोला कि वे कश्मीरी पंडित है. सात पीढ़ी पहले उनके पूर्वजों ने रातोंरात अपनी जमीन व मकान सब कुछ त्यागकर कश्मीर खाली कर दिल्ली चले आए. जिन्होंने खाली नहीं किया उन्हें धर्म बदलाव कर रहना पड़ा. अब कश्मीर में जो हुआ है, वह बहुत ही अच्छा हुआ है. उसे सहेज कर रखने के लिए केन्द्र सरकार ने सराहनीय कदम उठाया है. अब लग रहा है कि हिंदुस्तान अखंड हो रहा.

अनुच्छेद 370 हटने के बाद लिखी कविता सुनाई
कैलाश खेर ने बोला कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद उन्होंने जो महसूस किया उस पर कविता लिखी. उन्होंने पूरी कविता पढ़कर सुनाई. कविता का अंशा है कि सत्तर वर्ष में पहली बारी, डरे हुए हैं अत्याचारी, कांप रहे है दुष्ट संहारी, आंख तीसरी, दिन सोमवारी, आज का दिवस विशेष है, शिव का ही संदेश है, मरा नहीं था सोया था, पर अब जागा देश है, हिंदुस्तान का अब होगा अखंड, टूटेगा कुछ का घमंड, है सत्य का प्रकोप प्रचंड, सिंहासन बैठे मार्तंड, आज का दिवस है विशेष, शिव का ही संदेश है, मरा नहीं था सोया था अब जागा देश है.

कैलाश खेर की मुख्य बातें
- मैने कभी संगीत सीखा नहीं, कबीर, रैदास, खुसरो की कविता का प्रभाव है.
- कविता सुनकर संगीत में रुझान बढ़ने लगा.
- बाजारवाद पूरी संसार में बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है
- जब तक मजा आता है तब तक कलाकारों को मार्केट में परोसा जाता है
- हर वर्ष 7 जुलाई को नए युवाओं को संगीत की संसार में लांच करते हैं
- झारखंड कुबेर की भूमि है, परमात्मा, योगी व तपस्वियों की भूमि है झारखंड.
- 25 भाषाओं में 1200 फिल्मों के लिए गीत गा चुके हैं.