‘आतंकवाद व वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते’ : हुसैन हक्कानी

 ‘आतंकवाद व वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते’ : हुसैन हक्कानी

अमेरिका में पाक के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने ‘आतंकवाद व वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते’ के हिंदुस्तान के रुख का समर्थन करते हुए बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच कोई भी उच्च-स्तरीय वार्ता तब-तक निरर्थक रहेगी जब तक इस्लामाबाद अपनी सरजमीं से आतंकी ठिकानों को नहीं हटाता।

हक्कानी ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से बोला कि पाक की हिंदुस्तान के साथ बातचीत की हालिया पहल को उस पर पड़ रहे आर्थिक एवं अंतर्राष्ट्रीय दबाव के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

उनका यह बयान किर्गिस्तान में 13 - 14 जून को आयोजित हो रहे ‘शंघाई योगदान संगठन शिखर सम्मेलन’ से पहले आया है। हिंदुस्तान व पाक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह का भाग हैं वदोनों राष्ट्रों के नेता बिश्केक में होने वाली मीटिंग में भाग ले रहे हैं।

हक्कानी ने बोला कि हिंदुस्तान व पाक के बीच अन्य कोई भी उच्च-स्तरीय बातचीत तब तक निरर्थक है जब तक कि पाक अपनी सरजमीं से आतंकी ठिकानों को हटा नहीं देता।

उन्होंने कहा, ‘‘ 1950 से दिसम्बर 2015 के बीच दोनों राष्ट्रों के नेताओं ने 45 बार मुलाकात की है। लेकिन इन वार्ता से कभी भी स्थायी शांति कायम नहीं हो पाई। ’

उन्होंने कहा, ‘‘ बातचीत के दरवाजों को कभी भी स्थायी रूप से बंद नहीं माना जाना चाहिए’’

हक्कानी ‘हडसन इंस्टीट्यूट में ‘दक्षिण व मध्य एशिया’ के निदेशक हैं, जिन्हें पाकिस्तानी शासन व जिहादी विचारधारा का निर्विवाद आलोचक माना जाता है।