मोदी सरकार ने दिए अधिकार इस नए बिल में ग्राहकों को बिना एडवोकेट के केस लड़ने का मिलेगा अधिकार

 मोदी सरकार ने दिए अधिकार इस नए बिल में ग्राहकों को बिना एडवोकेट के केस लड़ने का मिलेगा अधिकार

कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2019 (Consumer Protection Bill 2019) को संसद की मंजूरी मिलने के बाद अब सरकार इसे लागू करने की तैयारी कर रही है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2019 संसद के दोनों सदनों में पास होने व राष्ट्रपति से मंजूरी मिल जाने के बाद एक्ट बन गया है। कंज्यूमर अफेयर सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने बोला कि अगस्त महीने के आखिर तक नियम बनाने का कार्य करेंगे। 3 महीने में सारे रूल्स तैयार होंगे। नए बिल में ग्राहकों को बिना एडवोकेट के लड़ने का अधिकार मिला है।

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CCPA को मिले कई अधिकार
कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल में को कई अधिकार दिए गए हैं। इससे ग्राहकों की परेशानियां दूर होंगी। CCPA में इन्वेस्टिगेशन विंग भी होगा। CCPA में से सरकार कंपनियों पर कार्रवाई करेगी। इन्वेस्टिगेशन विंग का हेड डीजी होगा, जबकि एडिशनल डीजी समेत कई ऑफिसर इस विंग में शामिल होंगे। सीसीपीए स्वत: संज्ञान ले सकता है। सीसीपीए भ्रामक प्रचार पर रोक के लिए भी कार्य करेगा।

अब जिला में 1 करोड़ रुपये तक की शिकायत व प्रदेश स्तर पर 10 करोड़ रुपये की शिकायत कर सकते हैं। पहले एडवोकेट रखना पड़ता था, अब बिना एडवोकेट के आप लड़ सकते हैं केस।

अब विज्ञापनों में झूठे दावे करने पर कारागार जाएंगे सेलेब्रिटीज
अब विज्ञापनों में झूठे वादे करने या गलत जानकारी देने पर कंपनियां, सर्विस प्रोवाइडर्स व तक कि उस एडवरटाईजमेंट को एंडोर्स करने वाले सेलेब्रिटीज को भी सजा हो सकती है। इन चीजों का दोषी पाए जाने पर जुर्माना या कारागार की सजा हो सकती है। इस बिल में प्रावधान रखा गया है कि कोई भी एडवरटाईजमेंट चाहे वो- प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, आउटडोर, ई-कॉमर्स, डायरेक्ट सेलिंग या टेलीमार्केटिंग किसी भी माध्यम से किया जा रहा हो, अगर इसमें गलत जानकारी दी जाएगी तो ये क्राइम की श्रेणी में आएगा।

इस बिल में ऐसे एडवरटाईजमेंट या मिसलीडिंग ऐड्स को ऐसे परिभाषित किया गया है, जिसमें किसी भी प्रॉडक्ट या सर्विस की झूठी जानकारी देना, झूठी गारंटी देना, कंज्यूमर्स को प्रॉडक्ट के नेचर, सब्सटेंस, क्वांटिटी या क्वालिटी को लेकर फुसलाना या जानबूझकर सर्विस प्रोवाइडर या मैन्युफैक्चरर की ओर से कोई जानकारी छुपाई जाए। इस बिल के तहत दिल्ली में सरकार की ओर से नियुक्त किए गए एक चीफ कमिश्नर की अध्यक्षता में एक सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो उपभोक्ता के अधिकारों के हनन, एडवरटाईजमेंट के अनैतिक ढंग या गलत दावे करने वाले मिसलीडिंग ऐड्स को रेगुलेट करेगी।

ये है सजा का प्रावधान
इस बिल के प्रावधान के मुताबिक, सर्विस प्रोवाइडर्स को 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ अधिकतम 2 वर्ष की कारागार की सजा हो सकती है। वहीं सेलेब्रिटीज को 10 लाख रुपये का जुर्माना झेलना पड़ सकता है। वहीं, बार-बार ये गलती करने पर अथॉरिटी उन पर 50 लाख रुपये के जुर्माने के साथ-साथ 5 वर्ष तक कारागार की सजा दे सकती है।

इतना ही नहीं, अथॉरिटी किसी सेलेब्रिटी के एडवरटाईजमेंट एंडोर्स करने पर एक वर्ष तक की रोक भी लगा सकती है। वहीं बार-बार यह गलती करने पर यह रोक तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।