कैंसर की बीमारी से छुटकारा पाना चाहते है तो करें ये...

कैंसर की बीमारी से छुटकारा पाना चाहते है तो करें ये...

मेडिकल साइंस ने कैंसर के इलाज के लिए इम्युनोथेरेपी की कार्यक्षमता को स्वीकार कर लिया है. अभी तक कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी को ही कैंसर का अंतिम इलाज माना जाता था जबकि इनके कई दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं. लेकिन इन दिनों कैंसर से बचाव व एडवांस्ड ट्रीटमेंट के रूप में विशेषज्ञ डेनड्रिटिक सेल थेरेपी ( Dendritic Cell Therapy ) को अपनाने लगे हैं. इससे रोगियों में आशा की नयी किरण जाग उठी है. हिंदुस्तान में सरकार ने भी इस इलाज विधि को मान्यता दे दी है.

डेनड्रिटिक सेल थेरेपी ( Dendritic Cell Therapy )
इसेे डैनवैक्स थैरेपी भी कहते हैं. इसमें रोगी की इम्युनिटी स्वाभावित रूप से बढ़ जाती है. यह इम्युनोथैरेपी ( Immunotherapy ) है जिसमें शरीर के रक्त में प्रवाहित होने वाली श्वेत रुधिर कोशिकाओं को कैंसर प्रतिरोधी सेल-डेन्ड्रिटिक में बदल देते हैं. ये कैंसर से लडऩे में सहायता करती हैं. जैसा कि इस विधि में श्वेत रुधिर कोशिकाओं का कल्चर टैस्ट होता है इसलिए कैंसर के गंभीर प्रकार में यह प्रभावी है. इसे कैंसर के उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाली थैरेपी जैसे कीमो, रेडियो आदि के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं. इससे कोई परेशानी नहीं आती है.

प्रभावी ( Denvax Therapy Benefits )
तीन माह तक चलने वाली डेन्ड्रिटिक सेल थैरेपी में रोगी को दो सप्ताह के अंतराल में 6 डोज देते हैं. खास बात है कि प्रारंभिक चरण के अतिरिक्त कैंसर की लास्ट स्टेज वाले रोगी के लिए भी यह उपयोगी है. यह पद्धति बीमारी को फैलने से रोकती है. ऐसे में रोगी के ज़िंदगी की गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश बढ़ जाती है. लिवर, ब्रेन, पेन्क्रियाज, ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर में यह ज्यादा प्रभावी है.

कई राष्ट्रों में प्रयोग ( Dendritic Cell Therapy For Cancer Success Rate )
कई राष्ट्रों में बे्रस्ट, फेफड़े, मायलोमा, प्रोस्ट्रेट व किडनी के कैंसर के उपचार में इस पद्धति का प्रयोग किया जा रहा है. अमरीका व ऑस्ट्रेलिया जैसे राष्ट्रों में इस पद्धति से उपचार बहुत पहले प्रारम्भ हो गया था. हिंदुस्तान में इसे आए कुछ ही वर्ष हुए हैं. दुनिया के कई व विकसित राष्ट्रों (जिनमें से एक जर्मनी भी है) में इस पद्धति पर निर्धारित दवाई को कैंसर के इलाज के लिए अनुमति दी गई है. आमतौर पर देशवासी विदेश जाकर उपचार लेते हैं लेकिन अब हिंदुस्तान में भी यह उपचार मिल सकेगा. दुष्प्रभाव कम और नतीजे अच्छा होने से यह प्रभावी है.