हचान के बाद कैंसर का उपचार कैसे तय करे जाने

हचान के बाद कैंसर का उपचार कैसे तय करे जाने

जीभ, जबड़े, मसूड़े, गाल, मुंह, बोलने और आहार नाल के शुरुआती भाग में कैंसर होता है. जीभ के कैंसर में पहले छाला होता है, जो भरता नहीं है. गाल के कैंसर में सफेद चकत्ते, लगातार खांसी के साथ खून आना, गले में छाले, सख्त गांठें होने पर गंभीरता से लें. आइए सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं गले के कैंसर के बारे में :-Image result for हचान के बाद कैंसर का उपचार कैसे तय

प्र। गले का कैंसर क्या है? इसके क्या लक्षण हैं?
गले में भिन्न-भिन्न तरह के कैंसर होते हैं. जीभ, जबड़े, मसूड़े, गाल, मुंह, बोलने और आहार नाल के शुरुआती भाग में कैंसर होता है. जीभ के कैंसर में छाला होता है, जो भरता नहीं है. उसमें खून आता है, दवाइयां लेने के बाद भी अच्छा नहीं होता है.

प्र। सर्जरी से पहले कौन-कौनसी जांचें की जाती है?
बायोप्सी के बाद, जाँच में सी। टी। स्कैन, एमआरआई जाँच कर बीमारी की स्टेज तय करके उपचार प्रारम्भ किया जाता है.

प्र। पहचान के बाद कैंसर का उपचार कैसे तय करते हैं?
पहचान होने के बाद मुंह के कैंसर में बायोप्सी में छोटा टुकड़ा लेकर मार्करस स्टडी की जाती है. इससे कैंसर के प्रकार का पता चलता है. मुंह के अंदर, गले, सांस की नली में कैंसर होने पर एंडोस्कोपी की जाती है. कैंसर के प्रकार का पता चलने पर उपचार प्रारम्भ करते हैं.

प्र। उपचार की क्या प्रक्रिया है?
कैंसर की पहचान के बाद उपचार तीन तरह से होता है. पहला उपाय सर्जरी द्वारा कैंसर वाले भाग को निकाल दिया जाता है. दूसरा रेडियोथैरेपी से व तीसरा उपाय कीमोथैरेपी से कैंसररोधी दवाएं दी जाती है. यह प्रक्रिया मरीज की केस स्टडी के बाद दी जाती है.

प्र। क्या सर्जरी के बाद कैंसर दोबारा होने कि सम्भावना है?
प्राइमरी कैटेगरी में कैंसर शरीर के दूसरे भाग में आए व सेकंडरी में गले में कैंसर की वजह से गांठ, लिवर, ब्रेन व गुर्दे में कैंसर हो तो सर्जरी के बाद भी दोबारा होने की संभावना हो सकती है.

प्र। मरीज के मन में कैंसर को लेकर क्या भ्रांतियां हैं?
लोगों में भ्रांति है कि उपचार से कैंसर शरीर में फैल जाता है. मरीज को समझाने के बाद भी अच्छा से इलाज नहीं कराते हैं.

प्र। क्या मरीज और परिजनों की काउंसलिंग की जाती है?
मरीज की हालत के अनुसार सर्जरी से दो हफ्ते पहले पोषक तत्त्व और दालें, सोयाबीन, सप्लीमेंट देते हैं. इसके बाद मरीज को सर्जरी से एक दिन पहले हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है. उपचार की प्रक्रिया के बारे में मरीज और परिजनों को समझाते हैं.

प्र। उपचार के बाद क्या सावधानियां बरतें?
धूम्रपान और शराब छोड़ दें. रेडिएशन के बाद साबुन, ऑयल न लगाएं. दांतों की नियमित जाँच कराएं. तरल पदार्थ और दूध-दलिया खूब लें. खानपान में ताजे फल, हरी सब्जियां, टमाटर लें.

प्र। रेडियोथैरेपी कैसे की जाती है?
मरीज के ट्यूमर के हिसाब से मशीन में एनर्जी तय की जाती है. रेडियोथैरेपी हफ्ते में पांच दिन दी जाती है. हफ्ते में एक दिन जाँच करते हैं. 6 से 7 हफ्ते तक थैरेपी दी जाती है.