अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रमुख आयोजक चिकित्सक संजय अरोड़ा ने बोला ये

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रमुख आयोजक चिकित्सक संजय अरोड़ा ने बोला ये

मिट्टी की जाँच करने वाली सरकार की सबसे बड़ी स्वायल हेल्थ कार्ड योजना सवालों के घेरे में है. प्राकृतिक संसाधन (मिट्टी और जल) विशेषज्ञों की नजर में यह योजना अपने उद्देश्य व किसानों की जरूरतों को पूरा करने में बहुत पास नहीं है. प्रक्रियागत खामियों की वजह से स्वायल हेल्थ कार्ड महज नुस्खा वाला पर्चा बनकर रह गया है. स्वायल कंजरवेशन सोसाइटी आफ इंडिया व व‌र्ल्ड एसोसिएशन आफ स्वायल एंड वाटर कंजरवेशन की ओर से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मिट्टी की बिगड़ती हालात को लेकर लंबी चर्चा हुई.

इसी दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चल रही स्वायल हेल्थ कार्ड के मसले पर जागरण ने प्रमुख विशेषज्ञों से वार्ता की. स्वायल साइंस के विशेषज्ञ प्रो। टीवीएस राजपूत ने बोला 'यह सिर्फ मिट्टी की भौतिक हालात बताने वाला पर्चा भर है. इसमें सामान्य सूचनाएं दर्ज की जा रही हैं. जबकि किसानों से पूछकर अगली फसल के हिसाब से फर्टिलाइजर का ब्यौरा दिया जाना चाहिए, जो उसके कार्य आ सकती है.'

स्वायल कंजरवेशन सोसाइटी आफ इंडिया के प्रेसीडेंट चिकित्सक सूरजभान ने तंज कसते हुए बोला 'इसमें है क्या, जनरल सूचना से क्या होगा. किसानों को कार्ड के नुस्खे के अर्थ कौन समझाएगा.' डाक्टर भान का बोलना है कि सारे देश के किसानों को एक जैसी सूचनाएं देने का कोई औचित्य नहीं है. सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी डाक्टर जगतवीर सिंह ने बोला 'यह सिर्फ दिखावे का स्वायल हेल्थ कार्ड हो गया है. किसानों को दिये जाने वाले कार्ड पर पूरी जानकारी दी जानी चाहिए. देश के ज्यादातर राज्यों में कृषि प्रसार प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. इतनी बेकार हालात में स्वायल हेल्थ कार्ड योजना भी उसकी भेंट चढ़ गया है.'

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रमुख आयोजक चिकित्सक संजय अरोड़ा ने बोला 'इतनी बड़ी योजना को पास बनाने के लिए बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना महत्वपूर्ण है. देश में स्वायल (मिट्टी) की जाँच के लिए जितनी प्रयोगशालाओं की आवश्यकता है, उसके मुकाबले बहुत कम है. जो प्रयोगशालाएं हैं उनमें से भी ज्यादातर में सूक्ष्म तत्वों की जाँच की सुविधा नहीं है. जबकि मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की भारी कमी है. इसकी भरपाई की बहुत आवश्यकता है, लेकिन इन तत्वों के बारे में स्वायल हेल्थ कार्ड में कोई सूचना नहीं है.' योजना की प्रक्रियागत त्रुटियों में सुधार की आवश्यकता है.