एपीडा के अध्यक्ष पवन कुमार बड़ ठाकुर ने बोला ये बात

 एपीडा के अध्यक्ष पवन कुमार बड़ ठाकुर ने बोला ये बात

( एपीडा ) के अध्यक्ष पवन कुमार बड़ठाकुर ने बोला है कि के बलबूते 2022 तक देश से बढ़ाकर 60 अरब डॉलर किया जाएगा. बड़ ठाकुर ने शुक्रवार को यहां आयोजित 11वें जैविक उत्पाद मेले के दूसरे दिन बोला कि की मदद से वाणिज्य व कृषि मंत्रालय के बीच अंतर को कम करने में मदद मिली है जिससे 2022 तक देश का 60 अरब डॉलर तक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कह कि यह महत्वकांक्षी लक्ष्य नहीं है.Image result for एपीडा के अध्यक्ष पवन कुमार बड़ठाकुर ने बोला ये बात

देश की निर्यात बास्केट में मुख्य रुप से मांस, समुन्द्री उत्पाद व बासमती चावल है जिसकी लगातार मांग बढ़ रही है. इसलिए इस लक्ष्य को हासिल कर लेना कोई कठिन कार्य नहीं होगा. वर्तमान में कृषि निर्यात 38 अरब डॉलर का है. 11वें बायोफैच मेले में विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी का जिक्र करते हुए बड़ठाकुर ने बोला कि भारतीय जैविक खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है व जल्द ही टेक्सटाइल व आयुर्वेदिक औषधियों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जायेगा. तीन दिन का यह मेला सात नवंबर को शुरु हुआ व 9 नवंबर तक चलेगा.

एपीडा के महाप्रबंधक तरुण बजाज ने मेले में एक सत्र को संबोधित करते हुए बोला कि चीन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, म्यांमार, बंगलादेश, मैक्सिको व यूरोपीय संघ से आए विदेशी खरीदारों ने अपने राष्ट्रों में जैविक उत्पादों की बढ़ती खपत को पूरा करने के लिए जैविक औषधीय पौधों, सौंदर्य प्रसाधनों, टेक्सटाइल से लेकर ज्वार जैसे मोटे अन्न तक भारतीय जैविक खाद्य उत्पादों में गहरी दिलचस्पी दिखाई है.

एपीडा के निमंत्रण पर विभिन्न राष्ट्रों से 80 खरीदार आए हैं. मेले में करीब 200 कंपनियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं. बजाज ने बोला विदेशी खरीदार भारतीय जैविक उत्पादों में दिलचस्पी दिखाने के अतिरिक्त कंपनियों तथा किसानों से भी सम्पर्क कर रहे हैं. वे कृषि पद्धतियों के बारे में सूचना, संसाधनों तथा जानकारी का आदान। प्रदान भी कर रहे हैं. विदेशी खरीदारों ने वैश्विक स्तर पर भारतीय जैविक उत्पादों का भाग बढ़ाने के लिए किसानों से तीन पहलुओं--गुणवत्ता, मात्रा तथा मूल्य पर ध्यान देने का सुझाव दिया है.

उन्होंने बोला कि संसार भर में लोग अब अपने खानपान व स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने लगे हैं. इससे जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है व वह रसायनजनित उत्पाद नहीं चाहते हैं. कुल कृषि निर्यात की तुलना में जैविक उत्पादों की हिस्सेदारी बहुत कम है किंतु इसमें जिस गति से बढ़ोतरी हो रही है वह बहुत प्रोत्साहित करने वाली है. जैविक उत्पाद की श्रेणी में तिलहन, मोटे अनाज, चीनी, फल जूस कंसेंट्रेट, चाय, मसालों, दालों, मेवों व औषधीय पौधे की मांग सबसे अधिक है.

महाप्रबंधक ने बोला कि भारतीय उत्पादों के बड़े खरीदार अमेरिका, यूरोपीय संघ के मेम्बर देश व कनाडा है किंतु अब इजरायल, वियतनाम व मैक्सिकों जैसे कई नये राष्ट्रों ने भी गहरी दिलचस्पी दिखाई है. अप्रसंस्कृत उत्पादों को यूरोपीय संघ व स्विट्जररलैंड में समान स्तर का माने जाने ओर यूएसडीए से हरी झंडी मिलने के बाद इन दिशों में निर्यात बढ़ाने में बहुत ज्यादा मदद मिली है.

मेले की मुख्य विशेषता पूर्वोत्तर राज्यों में उत्पादित जैविक उत्पादों का प्रदर्शन है. ये प्रदेश अब भारतीय जैविक कृषि उतपादों के केन्द्र बनते जा रहे हैं. असम की चाय, जोहा चावल व नींबू, सिक्किम की बड़ी इलायची व अदरक, मणिपुर से किंग मिर्च, मिजोरम का गन्ना, लोबिया व धान , मेघालय से पैशन फ्रूट व त्रिपुरा का अनानास प्रमुख हैं.