सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 10 विधायकों ने थामा बीजेपी  का दामन

सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 10 विधायकों ने थामा बीजेपी  का दामन

बीजेपी (BJP) ने पूर्वोत्तर (North East) को पूरी तरह से भगवा करने की दिशा में कदम बढ़ा लिया है। सिक्किम (Sikkim) में मुख्य विपक्षी दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट(SDF) के 10 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। यानी विधानसभा चुनावों में 2 प्रतिशत से कम वोट पाने वाली बीजेपी अब प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल बन गई है। सिक्किम ही पूर्वोत्तर का एकमात्र प्रदेश है, जहां भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार नहीं है।

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पूर्वोत्तर में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर व त्रिपुरा में भाजपा की सरकारें हैं व नगालैंड, मेघालय व मिजोरम में उसके सहयोगी दलों की सरकार है। पूर्वोत्तर में भाजपा ने एनडीए की तर्ज पर नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस यानी नेडा बनाया था, जो एक तरह से अब पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारें चला रहा है। सिक्किम में सत्ताधारी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के भी इस वर्ष हुए विधानसभा चुनावों से पहले तक भाजपा से दोस्ती की खबरें आती रही हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव पार्टी ने अकेले लड़ा था व 32 सदस्यीय विधानसभा में 17 सीटें हासिल करने में कामयाबी पाई थी।
मज़बूत विपक्ष की किरदार निभाएगी बीजेपी
इस सारे सियासी घटनाक्रम में बड़ी किरदार निभाने वाले भाजपा नेता राम माधव का बोलना है कि इन 10 विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को प्रदेश में मजबूती मिलेगी।भाजपा अब वहां एक मजबूत विपक्ष की किरदार निभाएगा। वहीं, भाजपा में शामिल होने वाले 10 विधायकों में से एक दोरजी थेरिंग लेपचा का बोलना है कि सिक्किम में लंबे समय से क्षेत्रीय दलों की ही सरकार रही है। अब वहां कमल खिलने के दिन करीब आ रहे हैं। लेपचा के मुताबिक उनके प्रदेश के युवा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं।

अलग थलग पड़े चामलिंग
सिक्किम में 25 वर्ष तक सरकार चलाने वाले पवन कुमार चामलिंग अब अपनी पार्टी में अकेले रह गए हैं। विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी का सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा से कांटे का मुकाबला हुआ। जिसमें चामलिंग की पार्टी को ज्यादा वोट हासिल हुए। लेकिन वो केवल 15 सीटें ही हासिल कर सके। सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने 17 सीटें जीतीं व उसके नेता पी एस गोले प्रदेश के सीएम बन गए। हालांकि भ्रष्टाचार के एक मुद्दे में दोषी साबित होने के बाद एक वर्ष कारागार में बिता चुके गोले को 6 माह के अंदर चुनाव जीतना ज़रूरी है। जबकि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक वो 7 वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकते। हालांकि इस नियम से राहत देने के लिए उनकी अर्जी चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है।

3 सीटों पर पुनर्मतदान

राज्य में पवन कुमार चामलिंग समेत तीन विधायक दो-दो सीटों पर चुनाव जीते थे। जाहिर है कि इन 3 सीटों पर भी पुनर्मतदान होना है। इस सारे घटनाक्रम को देखते हुए साफ है कि सिक्किम में भी कमल खिलने की पूरी आसार है। ऐसा होने के बाद ये भाजपा के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा, क्योंकि तब पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में या तो भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार होगी।