दो गैर सरकारी संगठन करेगी तंबाकू उत्पादों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध, ये हैं कारण

दो गैर सरकारी संगठन करेगी तंबाकू उत्पादों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध, ये हैं कारण

स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के बाद दो गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) पारंपरिक सिगरेटों व अन्य तंबाकू उत्पादों के विरूद्ध भी इसी तरह की कार्रवाई किये जाने के अनुरोध को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रहे है. इन संगठनों की दलील है कि ये उत्पाद अधिक हानिकारक हैं.

दिल्ली के एनजीओ यूनाइटेड रेजिडेंट ज्वाइंट एक्शन (ऊर्जा) व हैदराबाद के संगठन 'वीचेंजयू एक याचिका व 'क्लास सूट दायर करने की प्रक्रिया में है जिसमें वे धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के कारण पीड़ित लोगों के लिए पांच लाख रुपये, व परिवार के कमाने वाले मेम्बर को खोने वालों के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

सरकार ने हाल में एक अध्यादेश जारी किया था जिसके तहत ''वैकल्पिक धूम्रपान उपकरणों के उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण व एडवरटाईजमेंट को संज्ञेय क्राइम बनाया गया था." इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण व विज्ञापन) प्रतिषेध विधेयक, 2019 को बुधवार (27 नवंबर) को लोकसभा ने मंजूरी दी थी.

वीचेंजयू के निर्माणकर्ता व अध्यक्ष विजय भास्कर येतापु ने बोला कि सरकार के फैसला से कार्यकर्ताओं व तंबाकू की लत से ग्रस्त लोगों के लिए एक अनुकूल मौका पैदा हुआ है क्योंकि ''सरकार निकोटिन की लत संबंधी बीमारियों के प्रति संवेदनशील है जो उसके विभिन्न रूपों के बीच भेदभाव नहीं करेगी.”

उन्होंने कहा, ''अगर ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो पारंपरिक तंबाकू सिगरेट व बीड़ी पर भी लगाया जा सकता है - जो साफ तौर पर कैंसर या ऐसी बीमारियों का कारण बनती हैं, जिससे मृत्यु होती हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में बोला गया है कि तंबाकू धूम्रपान से हर साल 12 लाख लोगों की मृत्यु होती हैं. ई-सिगरेट के उपयोग के विषय में अभी तक चिकित्सकीय या वैज्ञानिक रूप से ऐसा कोई आंकड़ा या संबंध स्थापित नहीं हुआ है."

एनजीओ ने बोला कि वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत भूषण के पास गये थे व उन्होंने उनके मुद्दे को उठाने पर सहमति दी है. भूषण ने कहा, ''यह वास्तव में उल्लेखनीय है कि सरकार ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने को चुना है जिसका पहले तो जनसंख्या के 0.1 फीसदी लोगों द्वारा प्रयोग किया जाता है व दूसरी बात यह कि ये परंपरागत सिगरेटों की तुलना में कम नुकसानदायक है क्योंकि इनमें तंबाकू या 'टार नहीं होता व केवल निकोटिन होता है.”

उन्होंने कहा, ''इसलिए ई-सिगरेटों की तुलना में परंपरागत सिगरेटों के स्वास्थ्य पर अधिक असर पड़ते हैं. इसके अलावा, इन वैकल्पिक धूम्रपान उपकरणों पर प्रतिबंध से तंबाकू उद्योगों को मदद मिलती दिख रही है क्योंकि ई-सिगरेट का सेवन करने वाले लोगों के पारंपरिक सिगरेट का प्रयोग फिर से प्रारम्भ किये जाने की आसार है व यही कारण है कि इस विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिलने पर तंबाकू कंपनियों के शेयरों में 20 फीसदी का उछाल आया.

ऊर्जा के अध्यक्ष अतुल गोयल ने आरोप लगाया कि पूर्ण स्वामित्व वाली संस्थाओं के माध्यम से सरकार उन कंपनियों में भागीदार है जो सिगरेट का उत्पादन, प्रचार व बिक्री करती हैं. उन्होंने कहा, "जो सरकार सिगरेट की बिक्री से मुनाफा कमाती है, वह लत को बढ़ावा देती है. नशा खतरनाक होता है, सरकारों के खुद के आकलन में, हर वर्ष 12 लाख मृत्यु होती हैं व उसे इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए." उन्होंने बोला कि ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाये जाने संबंधी सरकार के निर्णय के बाद उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को लेटर लिखा था व इसके साथ-साथ परंपरागत सिगरेटों पर भी प्रतिबंध लगाये जाने का आग्रह किया था.