कर्नाटक से लाए गए प्रशिक्षित हाथिनियों का नहीं हो सका सदुपयोग, जाने कारण

कर्नाटक से लाए गए प्रशिक्षित हाथिनियों का नहीं हो सका सदुपयोग, जाने कारण

जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कर्नाटक के दुबारे एलिफेंट कैंप से जनवरी 2018 में पांच कुमकी हाथिनियों को छत्तीसगढ़ लाया गया था. इनमें से दो कुमकी हथिनियों ने बच्चों को जन्म दिया है.

 दोनों अपने बच्चों के पालन पोषण में लगी हैं. इसकी वजह से जंगली हाथियों का आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश रोकने की योजना विफल हो गई है. दोनों हथिनियां छत्तीसगढ़ आने के बाद ही गर्भवती हुई व ऐसे समय में बच्चों को जन्म दिया, जब इन्हें अभियान में उतारने के लिए तैयार किया जा रहा था.

कर्नाटक से लाए गए प्रशिक्षित हाथिनियों का नहीं हो सका सदुपयोग

बलरामपुर जिले के राजपुर वनपरिक्षेत्र में प्यारे हाथी से प्रयत्न में बहरादेव हाथी घायल हो गए. उनको उपचार के लिए दिसंबर 2019 के दूसरे पखवाड़े में रेस्क्यू सेंटर से कुमकी हाथी गंगा, योगलक्ष्मी व तीरथराम के योगदान से पैदल ही राजपुर रेंज के रेवतपुर लाया गया था. यहां बहरादेव के इलाज में इनकी उपयोगिता थी परंतु उसके पहले ही अस्थाई कैंप में गंगा हथिनी ने बच्चे को जन्म दे दिया. योगलक्ष्मी के भी गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर वापस रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, यहां उसने बच्चे को जन्म दिया. अब ये दोनों हथिनी अपने बच्चों की देखभाल में ही लगी हुई हैं.

जनवरी 2018 में लाया गया था छत्तीसगढ़

जनवरी 2018 में कर्नाटक से पांच कुमकी (विशेष प्रशिक्षित) हाथियों को छत्तीसगढ़ लाया गया था. छत्तीसगढ़ की आबोहवा में ढालने के लिए सबसे पहले उन्हें महासमुंद के पासीद कैंप में रखा गया था. लगभग 10 महीने तक पसीद कैंप में रहने के बाद पांचों कुमकी हाथियों को सूरजपुर जिले के रमकोला स्थित हाथी रेस्क्यू सेंटर में रखा गया. रेस्क्यू सेंटर में बीत रहा दिन : सूरजपुर वनमंडल के हाथी रेस्क्यू सेंटर में पांच कुमकी हाथी, दो बच्चे के अतिरिक्त सोनू व सिविल बहादुर हाथी भी निवास कर रहे हैं. यहां कुल सात हाथियों की देखभाल की जा रही है.