गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा,''अगर हिंदू शादीशुदा महिला करती है चूड़ी व सिंदूर लगाने से मना तो.....

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा,''अगर हिंदू शादीशुदा महिला करती है चूड़ी व सिंदूर लगाने से मना तो.....

अगर कोई हिंदू शादीशुदा महिला हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक संख (शंख से बनी चूड़ी) पहनने व सिंदूर लगाने से मना करती है तो इसका मतलब यह है कि उसे शादी मंजूर नहीं है. 

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक पति की तलाक की अर्जी मंजूर करते हुए यह अहम टिप्पणी की. जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस सौमित्र सैकिया की पीठ ने बोला कि चूड़ी व सिंदूर हिंदू दुल्हन का शृंगार माना जाता है. अगर वह इसे धारण करने से मना करती है तो इसका मतलब यह है कि उसे विवाह स्वीकार नहीं है व उसकी अनिच्छा से शादी कर दिया गया.


दो सदस्यीय पीठ ने कहा, संख व सिंदूर पहनने से मना करने को अपीलकर्ता के साथ शादी को स्वीकार करने से मना करने का इशारा माना जाएगा. ऐसी परिस्थितियों में पति को पत्नी के साथ वैवाहिक ज़िंदगी में बने रहने के लिए विवश करना उत्पीड़न माना जा सकता है. परिवार न्यायालय ने पति की अर्जी ठुकरा दी थी, मगर उच्च न्यायालय ने पत्नी के विरूद्ध दायर की गई याचिका का हवाला देते हुए परिवार न्यायालय के निर्णय को पलट दिया.
उच्च न्यायालय ने कहा, पत्नी ने पति पर क्रूरता का जो आरोप लगाया है, वह साबित नहीं होता है. पीठ ने कहा, पति या उसके परिवार के सदस्यों के विरूद्ध निराधार आरोपों के आधार पर आपराधिक मुद्दे दर्ज करने की ऐसी हरकतें बडे़ पैमाने पर क्रूरता है. उच्च न्यायालय का यह निर्णय बीते 19 जून को आया था.उच्च न्यायालय ने पाया कि पति ने निचली न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया था कि पत्नी ने संख व सिंदूर पहनने से मना कर दिया था. उसकी ओर से पत्नी के विरूद्ध कोई टकराव नहीं खड़ा किया गया. दरअसल, असम की एक परिवार न्यायालय ने पति की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें बोला गया था कि पति की ओर से पत्नी के विरूद्ध कोई क्रूरता नहीं की गई थी.

पति का आरोप, पत्नी ससुराल वालों के साथ रहने को तैयार नहीं

अपनी याचिका में पति ने आरोप लगाया कि फरवरी 2012 में हुई विवाह के एक महीने बाद पत्नी ने संयुक्त परिवार में रहने से मना कर दिया व पति के साथ अलग स्थान रहने की मांग की. संबंधियों के संबंध बिगड़ गए व पत्नी ने अक्सर झगड़े प्रारम्भ कर दिए व बच्चे न होने के लिए भी पति को दोषी ठहराया.

पत्नी ने 2013 में ससुराल छोड़ दिया व पति व उसके परिवार के सदस्यों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत क्रूरता का मुद्दा दर्ज किया. पति व संबंधियों को बाद में उस मुद्दे में उच्च न्यायालय ने रिहा कर दिया गया था. इसके बाद पति ने अलग से तलाक का केस दायर किया.

पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का भी लगाया आरोप

पत्नी ने क्रूरता को आधार बनाकर किए गए मुकदमे में पति व ससुराल वालों पर दहेज के लिए उत्पीड़न का भी आरोप लगाया. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे भोजन व चिकित्सा से वंचित रखा गया था व उसका भाई ही उसकी देखभाल करता था.