इटली से लौटा कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज ने बताई अपनी दास्ता, जानके आप हो जायेगे हैरान

इटली से लौटा कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज ने बताई अपनी दास्ता, जानके आप हो जायेगे हैरान

वर्ष के मार्च महीने व उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस (Corona Virus) के पॉजिटिव केस मिलने की आरंभ एक साथ ही हुई थी। संदिग्ध से सीधे पॉजिटिव केस मिलने से उत्तर प्रदेश (UP) ही नहीं देशभर में हड़कंप मच गया था।

 देशभर की निगाहें इस केस पर लग गई थीं। यह उत्तर प्रदेश के एक खास शहर का मुद्दा था। रातों-रात पॉजिटिव केस को शहर से दिल्ली के एम्स (Aiims) अस्पताल भेज दिया गया। यह शख्स इटली (Itlay) से लौटा था। इसके बाद तो उसके परिवार व आस पड़ोस के कई लोगों को निगरानी में ले लिया गया। लेकिन इटली से लौटे यह कारोबारी अब अच्छा हैं। अस्पताल से घर जा चुके हैं। लेकिन एहतियात इतनी बरत रहे हैं कि खुद व अपने परिवार को कई दिन पहले से ही घर के अंदर बाहरी लोगों से अलग कर लिया है।

वो मेरा 14 दिन का जिंदगी-मौत व जिंदगी का सफर था
जैसे मैं हमेशा की तरह टूर से लौटता था वैसे ही इस बार भी 2 मार्च को इटली से लौटा था। मुझे किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं थी। लेकिन दो दिन बाद ही बुखार व जुकाम की शिकायत होने लगी। एकदम निमोनिया जैसी हालत हो गई। मैंने बीते दिनों पर गौर किया तो मुझे कहीं भी नहीं लगा कि मैंने कोई कुछ ऐसा खाया-पिया है जिससे मुझे निमोनिया हो। वक्त के साथ तकलीफ बढ़ने लगी। सांस लेने में भी परेशानी महसूस होने लगी। इससे पहले फोन पर फैमिली चिकित्सक से पूछकर दवाई खा रहा था।

तभी मुझे व चिकित्सक को कुछ संदेह महसूस हुआ। चाइना की खबरें हम लगातार पढ़ रहे थे। मेरे चिकित्सक ने उसके बारे में व ज़्यादा पता किया तो मुझे 80 फीसद लगने लगा कि मैं कोरोना वायरस की चपेट में आ गया हूं, क्योंकि मैं इटली से लौटा था। चीफ मेडिकल अधिकारी से बात की। उन्होंने तुरंत ही दिल्ली भेज दिया। यहां एम्स में 14 दिनों के लिए आइसोलेट कर दिया गया। मुझे महत्वपूर्ण टिप्स देने के साथ ही यह समझाया गया कि आपको किसी भी हाल में तनाव नहीं लेना है। 14 दिन तक डॉक्टर, नर्स व टीवी पर कोरोना की खबरें ही मेरे आसपास थे। दिन में सिर्फ दो बार फोन पर घर वालों से बात करने की इजाजत थी। दरवाजे के शीशे से पत्नी को देख लेता था।



लेकिन मैं अपने बच्चों व सारे परिवार को फिर से देखना चाहता था, किसी भी तरह से मेरी बीमारी उन्हें न लग जाए इसलिए डॉक्टरों की हर बात मानता रहा। ठीक बात तो यह है कि चिकित्सक की दी हुई जितनी हिदायत हम मानेंगे वो ही हमें जल्द से जल्द अच्छा करेंगी। लेकिन इंसानी फितरत के मुताबिक 14 दिन 14 वर्ष के वनवास जैसे लग रहे थे। लेकिन बड़ी बात यह है कि मेरे बच्चों से लेकर मेरे मां-बाप तक फोन पर हंस-हंस के बातें करते हुए मेरा हौसला बढ़ाते रहे। लेकिन एक दिन बात करते हुए मेरी मां रो पड़ीं। तब मैंने उन्हें समझाया मां मैं तो अच्छा हो रहा हूं। बेटे से कहा, दादी को मोबाइल पर अच्छा होने वाले मरीजों के बारे में बताता रहे। अच्छा होने के बाद अब घर आ चुका हूं। लेकिन जनता कर्फ्यू व लॉकडाउन से पहले ही हमारा परिवार घर के अंदर ही बाहरी लोगों से दूर है।