जाने क्यों बोला जाता है चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या, जाने

जाने क्यों बोला जाता है चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या, जाने

 आज 24 मार्च को चैत्र अमावस्या है। हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का बहुत ज्यादा धर्मिक महत्व माना गया है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या बोला जाता है। 

इसके बाद से विक्रम संवत्सर जिसे कि हिंदू धर्म का नया वर्ष बोला जाता है, लग जाता है। चैत्र अमावस्या के अगले दिन से ही नवरात्रि प्रारंभ हो जाएंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत व श्राद्ध व तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति व मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त

चैत्र अमावस्या का शुभ समय:
चैत्र अमावस्या 24 मार्च को प्रातः काल 6 बजकर 20 मिनट से लग जाएगी।
सर्वार्थ सिद्धि योग: आज प्रातः काल 6 बजकर 20 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 19 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। मान्यता के अनुसार, यह योग बहुत ज्यादा शुभ होता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य फलदायी होते हैं।


अभिजित मुहूर्त: यह मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

चैत्र अमावस्या पर इस विधि से करें पूजा-अर्चना:

चैत्र अमावस्या के दिन प्रातः काल जल्दी बिस्तर त्याग दें। इसके बाद प्रातः ही किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें। यदि यह सुविधा न मिल पाए तो नहाने के पानी में गंगा जल मिला लें

इसके बाद जब सूर्य देव उदय हों तो उन्हें प्रणाम कर जल अर्पित करें व ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।

पितरों की आत्मा की शांति व मुक्ति के लिए विधिवत ढंग से धार्मिक कर्मकांड सारे करें। इसके बाद पितरों को तर्पण दें।

पूजा समापन होने के पश्चात ब्राह्माण देवता व जरूरतमन्दों को अपनी इच्छानुसार दान व दाक्षिणा दें।

चैत्र अमावस्या की महिमा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,चैत्र अमावस्या का व्रत रखने से पितरों की आत्मा शांत होती है व उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसलिए यह पूर्वजों को समर्पित मानी जाती है। जो जातक पितृ गुनाह से परेशान हैं अगर वो यह व्रत रखते हैं व श्राद्ध व तर्पण देते हैं तो उनका यह गुनाह कट जाता है। इसके साथ ही पूर्वज मुक्ति को प्राप्त होते हैं।