214 दिनों में सबसे कम सक्रिय मामले, 24 घंटे में 15 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज

214 दिनों में सबसे कम सक्रिय मामले, 24 घंटे में 15 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज

देश में हर दिन नए मामलों की तुलना में ज्यादा रिकवरी दर्ज की जा रही हैं। बीते 24 घंटे में संक्रमण के 15 हजार से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं और इस दौरान 22 हजार से ज्यादा लोग संक्रमण से ठीक हुए हैं। इसके साथ ही सक्रिय मामले घटकर 2,07,653 हो गए हैं, जो 214 दिनों में सबसे कम है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में रिकवरी दर 98.06 प्रतिशत दर्ज की गई है। 24 घंटे के दौरान सक्रिय कोविड केसलोएड में 7,247 मामलों की कमी दर्ज की गई है। दैनिक सकारात्मकता दर 1.19 फीसद दर्ज की गई है। पिछले 44 दिनों से यह तीन फीसद से भी कम है। साप्ताहिक सकारात्मकता दर 1.46 फीसद दर्ज की गई थी। मंत्रालय के मुताबिक पिछले 110 दिनों से यह तीन फीसदी से नीचे है।

वहीं, एक दिन पहले 14 हजार के ऊपर नए मामले सामने आए थे जबकि ठीक होने वालों का आंकड़ा 23 हजार से ज्यादा था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 15,823 मामले सामने आए हैं और 22,844 रिकवरी दर्ज की गई हैं। वहीं, इस दौरान संक्रमण के कारण 226 लोगों की मृत्यु हो गई है।

ताजा मामलों के बाद देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की कुल संख्या 3,40,01,743 तक पहुंच गई है। इसमें से 3,33,42,901 लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं और 4,51,189 लोगों की मृत्यु हुई है। इसके अलावा 2,07,653 कोरोना मरीजों का फिलहाल इलाज चल रहा है, यह आंकड़ा 214 दिनों में सबसे कम है।


एक दिन पहले पूरे 224 दिन यानी साढ़े सात महीने बाद देश में कोरोना संक्रमण के सबसे कम 14,313 नए मामले मिले थे। इनमें केरल में करीब सात हजार और महाराष्ट्र में करीब दो हजार मामले शामिल हैं। पिछले दिनों की तुलना में दोनों राज्यों में नए मामलों में भारी गिरावट आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दिन में 181 लोगों की मौत हुई थी।


आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) के शोधकर्ता वाहनों के लिए अपनी तरह के पहले 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम' को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो सड़क के बुनियादी ढांचे और भौगोलिक स्थिति के आधार पर चालक को वाहन की तेज गति से हो सकने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिहाज से सतर्क करेगा।सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 70 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं वाहन की तेज गति के कारण होती हैं। ऐसी दुर्घटनाओं को कम से कम करने के लिए सरकार ने एक जुलाई, 2019 के बाद बिकने वाली सभी नई कारों में गति नियंत्रण उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। वाहन की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने पर यह उपकरण चेतावनी स्वरूप बीच-बीच में बीप की आवाज करेगा और 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार होने पर बीप की आवाज लगातार होगी।


हालांकि आइआइटी गुवाहाटी और आइआइटी बंबई के शोधकर्ताओं का मानना है कि गति नियंत्रण उपकरण में उतनी बुद्धिमता नहीं है कि यह पहाड़ी क्षेत्रों, मैदानी इलाकों या रेगिस्तानी स्थानों समेत हर जगह प्रभावी रूप से काम कर सके।आइआइटी गुवाहाटी में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने कहा, 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत है जो सड़क के ढांचे के मुताबिक गति के बारे में बता सके और तेज गति से हो सकने वाले हादसों को रोका जा सके।'