बाहरवीं के बाद यूपीएससी और एसआइ के लिए कैसे तैयारी करें, एक्सपर्ट यहां दे रहे हैं करियर से जुड़े सवालों के जवाब

बाहरवीं के बाद यूपीएससी और एसआइ के लिए कैसे तैयारी करें, एक्सपर्ट यहां दे रहे हैं करियर से जुड़े सवालों के जवाब

उत्साह और आत्मविश्वास होने के बावजूद युवाओं को अक्सर अपने लिए समुचित करियर और उससे जुड़ी पढ़ाई के बारे में सटीक निर्णय लेने में दुविधा होती है। ऐसी ही दुविधा को दूर करने और सही राह दिखाने के लिए युवाओं के सवालों के जवाब दे रहे हैं सीनियर करियर काउंसलर अरुण श्रीवास्तव...

-मैंने इसी वर्ष सीबीएसई बोर्ड से बारहवीं किया है। मेरा एकमात्र लक्ष्य यूपीएससी क्लियर करना है। इसीलिए मैंने आर्ट्स का चयन किया था। कृपया मुझे बताएं कि इसके लिए मुझे बीए एलएलबी और बीए में किसे चुनना चाहिए?

-निष्ठा पांडेय, ईमेल से

यदि आप करियर में प्लान बी के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं, तो आपको बीए एलएलबी करने के बारे में विचार करना चाहिए। हां, अगर पूरा फोकस यूपीएससी (सिविल सेवा परीक्षा) पर ही रखना चाहती हैं, तो बीए चुन सकती हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि स्ट्रीम और विषय आपकी रुचि के हों, ताकि आपका मन रमे और आप उसमें बेहतर प्रदर्शन कर सकें। जहां तक यूपीएससी क्लियर करने की बात है, तो इस दिशा में अपनी तैयारी को आगे बढ़ाते समय ज्यादा अध्ययन सामग्री जुटाने और भ्रमित होने के बजाय सीमित संख्या में प्रामाणिक अध्ययन स्रोतों को अपनी तैयारी का आधार बनाएं। यदि आपने कुछ समय पहले पिछले साल के अंतिम परिणाम में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पढ़ें होंगे, तो इस बात पर जरूर गौर किया होगा कि लगभग सभी ने एनसीईआरटी की किताबों (छठीं से बारहवीं तक की) किताबों को तथ्यों/धारणाओं की समझ के लिए सबसे कारगर बताया। हमेशा की तरह हाल में संपन्न सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में के अधिकतर प्रश्न भी इन्हीं किताबों से थे।


-मेरी उम्र 17 वर्ष है। मैं अभी बारहवीं का छात्र हूं। खेल में मेरी बहुत ज्यादा रुचि है। 100 और 200 मीटर एथलेटिक की तैयारी करता हूं। अपने देश भारत को ओलिंपिक में गोल्ड मेडल दिलाना चाहता हूं। मेरी परेशानी यह है कि ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं लेने के कारण मुझे अल्सरेटिव कोलाइटिस नामक बीमारी हो गई है, जिससे आंतों में संक्रमण होने आदमी बहुत कमजोर हो जाता है। मुझे अब अपने भविष्य के बारे में कुछ समझ में नहीं आ रहा। मैं क्या करूं? कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।


-गुलशन सिंह, आजमगढ़, ईमेल से

आप अपने उत्साह को जरा भी कम न होने दें। सबसे पहले किसी बड़े और अच्छे संस्थान में अपना इलाज कराने का प्रयास करें। बीएचयू या एम्स में दिखा सकते हैं। इसके अलावा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और योग की भी मदद लें। अपने मनोबल को बनाए रखते हुए इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, तो अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने में मदद मिल सकेगी। एक बार पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित रखते हुए आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें।


-मैंने इसी साल बारहवीं किया है। कृपया बताएं कि यूपी पुलिस में एसआइ की तैयारी के लिए मुझे स्नातक रेगुलर करना चाहिए या प्राइवेट? कृपया यह भी बताएं कि इसकी तैयारी कैसे करूं और क्या पढ़ना चाहिए?

-हनी सिंह, ईमेल से

यदि रेगुलर पढ़ाई करने में कोई खास परेशानी नहीं है, तो आपको ऐसा ही करना चाहिए। इससे पढ़ाई में निरंतरता बनी रहती है। इसके साथ आप सुबह-शाम अपने समय का समुचित प्रबंधन करते हुए एसआइ की तैयारी भी जारी रख सकते हैं। जहां तक तैयारी की बात है, तो आपको सबसे पहले इस परीक्षा के सिलेबस और पिछले कुछ वर्षों के प्रश्नपत्रों की मदद से पूछे जाने वाले की प्रकृति को समझने का प्रयास करना चाहिए। इसके बाद आनलाइन प्रामाणिक कंटेंट और बाजार में उपलब्ध पुस्तकों, मॉक टेस्ट आदि की मदद से लिखित परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को आगे बढ़ा सकते हैं। रिटेन एग्जाम की नियमित तैयारी के साथ फिजिकल टेस्ट और फिजिकल इफिशिएंसी टेस्ट के लिए भी खुद को तैयार करते रहें।


आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) के शोधकर्ता वाहनों के लिए अपनी तरह के पहले 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम' को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो सड़क के बुनियादी ढांचे और भौगोलिक स्थिति के आधार पर चालक को वाहन की तेज गति से हो सकने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिहाज से सतर्क करेगा।सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 70 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं वाहन की तेज गति के कारण होती हैं। ऐसी दुर्घटनाओं को कम से कम करने के लिए सरकार ने एक जुलाई, 2019 के बाद बिकने वाली सभी नई कारों में गति नियंत्रण उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। वाहन की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने पर यह उपकरण चेतावनी स्वरूप बीच-बीच में बीप की आवाज करेगा और 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार होने पर बीप की आवाज लगातार होगी।


हालांकि आइआइटी गुवाहाटी और आइआइटी बंबई के शोधकर्ताओं का मानना है कि गति नियंत्रण उपकरण में उतनी बुद्धिमता नहीं है कि यह पहाड़ी क्षेत्रों, मैदानी इलाकों या रेगिस्तानी स्थानों समेत हर जगह प्रभावी रूप से काम कर सके।आइआइटी गुवाहाटी में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने कहा, 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत है जो सड़क के ढांचे के मुताबिक गति के बारे में बता सके और तेज गति से हो सकने वाले हादसों को रोका जा सके।'