IAF में शामिल पांच राफेल ने लगायी आसमान में अपनी दहाड़, हिमाचल के पहाड़ों पर भरी उड़ान

IAF में  शामिल पांच राफेल ने लगायी आसमान में अपनी दहाड़, हिमाचल के  पहाड़ों पर भरी उड़ान

हाल ही में भारतीय एयरफोर्स (IAF) में शामिल हुए पांच ने आसमान में अपनी दहाड़ लगानी प्रारम्भ कर दी है। फ्रांस (France) से हिंदुस्तान (India) पहुंचे राफेल फाइटर जेट ने

रात के समय हिमाचल (Himachal) के पहाड़ों पर उड़ान भरी। इन फाइटर जेट की प्रैक्टिस इसलिए की जा रही है ताकी आवश्यकता पड़ने पर ये लद्दाख में वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एयर-टु-एयर मिसाइल व एयर टु ग्राउंड मिसाइलों के साथ शत्रु को तबाह कर सकें।

बता दें कि हिंदुस्तान की सरजमीं पर इन दिनों अंबाला एयर पर किसी भी ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले वर्ष तक मिलने वाले सभी 36 राफले में से 18 अंबाला तो 18 राफेल जेट भूटान सीमा पर हासिमारा एयरबेस पर तैनात किए जाएंगे। बता दें कि हिंदुस्तान ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 लड़ाकू राफेल जेट खरीदे हैं, जिनमें से 5 विमान हिंदुस्तान को मिल चुके हैं।

राफेल जेट के हिमाचल के आसमान में प्रैक्टिस के बारे में जानकारी देते हुए एक ऑफिसर ने बताया कि अभी इन विमानों को एलएसी से दूर रखा जा रहा है ताकि अक्साई चाइना में तैनात पीएलए के रडार इसके फ्रीक्वेंसी सिग्नेंचर को ना पहचान सकें। क्योंकि बेकार स्थिति में वे इनका प्रयोग जैम करने के लिए भी कर सकते हैं। मिलिट्री एविएशन के एक्सपर्ट बताते हैं कि राफेल में खूबी है कि वह सिग्नल फ्रीक्वेंसी को बदल सकता है। अगर हिमाचल में राफेल को प्रैक्टिस के लिए प्रयोग किया जा रहा है तो इसकी सिग्नल फ्रीक्वेंसी को बदलकर इसका प्रयोग किया जा सकता है। 
चीन ने पहाड़ों पर लगाएं हैं रडार
मिलिट्री एविएशन से जुड़े एक्सपर्ट बताते हैं कि बेहतर व सटीक सूचना हासिल करने के लिए पीएलए ने अपने इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस रडार्स अक्साई चाइना के पहाड़ों पर लगा रखे हैं। पीएलए के एयरक्राफ्ट डिटेक्शन रडार बहुत ज्यादा बेहतर हैं क्योंकि उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

राफेल की अच्छाई इसे बनाती है औरों से अलग
हिंदुस्तान के राफेल की अच्छाई है कि लड़ाकू विमान एयर-टु-एयर मिटियोर मिसाइल, एमआईसीए मल्टी मिशन एयर टु एयर मिसाइल व क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। इसमें लगी आधुनिक तकनीक पायलट को दूर से ही हमले की जानकारी दे देती हैं। मिटियोर मिसाइलें का नो-एस्केप जोन मौजूदा मीडियम रेंज एयर-टु-एयर मिसाइलों से तीन गुना अधिक है। ये मिसाइलें 120 किलोमीटर तक टारगेट पर सटीक निशाना लगा सकती हैं।