रूस-यूक्रेन युद्ध ही नहीं चीजें महंगी होने के और भी हैं कारण

रूस-यूक्रेन युद्ध ही नहीं चीजें महंगी होने के और भी हैं कारण

अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई की रेट 7.8 प्रतिशत रही. यानी, पिछले वर्ष अप्रैल के मुकाबले इस वर्ष भारतीय कंज़्यूमरों को रोजमर्रा की चीजें आठ प्रतिशत अधिक दाम पर मिलीं. खुदरा महंगाई की ये रेट बीते आठ वर्ष में सबसे अधिक है. 

इतना ही नहीं रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित लक्ष्य से भी ये करीब दो गुना है. दरअसल अक्टूबर 2016 से रिजर्व बैंक को खुदरा महंगाई की रेट चार प्रतिशत के स्तर पर रखने का नियम है. हालांकि, इसमें दो प्रतिशत की छूट है यानी ये दो प्रतिशत से छह प्रतिशत तक रह सकती है.  

क्या राष्ट्र में बढ़ती महंगाई की वजह यूक्रेन-रूस संकट है?
यूक्रेन में चल रहे युद्ध की वजह से बढ़ी कच्चे ऑयल की कीमतों ने इस महंगाई के इजाफे में बड़ा सहयोग दिया है. कीमतें बढ़ने की संभावना पहले से ही थी. हालांकि, अकेले युद्ध की वजह से ही ऐसा नहीं हुआ है. अक्तूबर 2019 के बाद खुदरा महंगाई सिर्फ एक बार चार प्रतिशत के स्तर को छुआ है. बाकी हर महीने में ये न केवल चार प्रतिशत से अधिक रही बल्कि ज्यादातर समय ये छह प्रतिशत के ऊपर भी गई.  पिछले सात महीने से लगातार महंगाई रेट बढ़ रही है. हिंदुस्तान में वर्ष की आरंभ से ही महंगाई रेट छह प्रतिशत से ऊपर थी. यानी, जब रूस-यूक्रेन संकट प्रारम्भ हुआ उससे एक महीने पहले भी खुदरा महंगाई की रेट तय सीमा से अधिक थी. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि आने वाले महीनों में इसमें राहत मिलने की आसार बहुत कम है. एक्सपर्ट्स का बोलना है कि ये रेट छह प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी.  

रूस-यूक्रेन युद्ध से इतर बढ़ती महंगाई की और कौन सी वजहें हैं? 
2019-20 से लगातार महंगाई की रेट चार प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है. दरअसल, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का उपयोग करके मुद्रास्फीति की गणना की जाती है. इस सूचकांक में भिन्न-भिन्न भार के साथ भिन्न-भिन्न श्रेणियां हैं. कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, उत्पादन लागत के अतिरिक्त कई अन्य चीजें होती हैं, जिसकी किरदार खुदरा महंगाई की रेट तय करने में अहम होती है.   

उदाहरण के लिए 2019-20 में जब महंगाई की रेट 4.8 प्रतिशत थी. उस समय इसका बड़ा कारण खाद्य पदार्थ की कीमतों में आया छह प्रतिशत का उछाल था. इसी तरह 2020-21 में राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी के कारण बड़ा धक्का लगा. उस समय भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में 7.3 प्रतिशत का वृद्धि हुआ. उस समय भी महंगाई रेट 5.5 प्रतिशत थी. 

मार्च के मुकाबले महंगाई रेट में कितना वृद्धि हुआ है?
मार्च में खुदरा महंगाई की रेट 6.95 प्रतिशत थी. जो अप्रैल महीने में 7.79 प्रतिशत पहुंच गई. शहरों के मुकाबले गांवों में महंगाई रेट अधिक है. शहरों में अप्रैल में जहां महंगाई रेट 7.09 प्रतिशत थी वहीं, गांवों में खुदरा महंगाई की रेट 8.38 प्रतिशत रही. मार्च में भी शहरों को मुकाबले गांवों में महंगाई अधिक थी. मार्च महीने में शहरों में खुदरा महंगाई की रेट जहां 6.12 प्रतिशत थी. वहीं, गांवों में खुदरा महंगाई की रेट 7.66 प्रतिशत रही. एक वर्ष पहले की बात करें तो महंगाई रेट 4.23 प्रतिशत थी. सालभर पहले गांवों के मुकाबले शहरों में महंगाई अधिक थी. अप्रैल 2021 में शहरों में खुदरा महंगाई की रेट 4.71 प्रतिशत थी वहीं, गांवों में ये रेट 3.75 प्रतिशत थी.  

बढ़ती महंगाई - फोटो : मीडिया बढ़ती महंगाई - फोटो : मीडिया

क्या भिन्न-भिन्न राज्य के लोगों पर महंगाई का असर अलग है?

जी, हां. महंगाई की सबसे अधिक मार पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लोगों पर पड़ी है. पश्चिम बंगाल में महंगाई रेट में सबसे अधिक 9.12 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. वहीं, मध्य प्रदेश में  9.10 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. हरियाणा में एक वर्ष में महंगाई 8.95 प्रतिशत बढ़ी है. महाराष्ट्र में महंगाई रेट 8.78 प्रतिशत हो गई है. इसके अतिरिक्त असम, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, यूपी और जम्मू कश्मीर में भी महंगाई रेट आठ प्रतिशत से अधिक रही.

इन राज्यों में सबसे अधिक महंगाई

पश्चिम बंगाल

9.12%

मध्य प्रदेश

9.10%

हरियाणा

8.95%

महाराष्ट्र

8.78% 

असम

8.54%

उत्तर प्रदेश

8.46%

गुजरात

8.20%

राजस्थान

8.12%

सोर्स: mospi  

बढ़ती महंगाई - फोटो : मीडिया

इस बढ़ती महंगाई का क्या-क्या असर हो सकता है? 
महंगाई बढ़ने का कई चीजों पर असर होता है. जैसे बढ़ती महंगाई लोगों की क्रय शक्ति कम कर देती है. इसकी वजह से समग्र मांग कम हो जाती है. इससे बचत करने वाले को हानि होता है तो उधार देने वाले को लाभ होता है. 

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 कौन सी चीजें सबसे अधिक महंगी हुई हैं?
खाने पीने की चीजों की बात करें तो तेल, सब्जी और मसाले सबसे अधिक महंगे हुए हैं. ऑयल के दामों में सबसे अधिक 17.28 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. वहीं, सब्जियां पिछले वर्ष के मुकाबले 15.41 प्रतिशत महंगी हो गई हैं. मसालों की कीमतें भी 10.56 प्रतिशत बढ़ी हैं. 

कपड़े और जूते पहनना भी हुआ महंगा
खाने पीने की चीजों से इतर सबसे अधिक महंगे जूते-चप्पल हुए हैं. इनके दामों में 12.12 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. कपड़े भी 9.51 प्रतिशत महंगे हो गए हैं. परिवहन और संचार 10.91 प्रतिशत तो ईधन और बिजली के दामों में 10.80 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. 

इन चीजों पर महंगाई की मार सबसे ज्यादा

खाद्य तेल

17.28%

सब्जी

15.41%

जूता-चप्पल

12.12%

परिवहन और संचार

10.91%

ईंधन और बिजली

10.80%

मसाले

10.56%

सोर्स: mospi

क्या भिन्न-भिन्न राज्य के लोगों पर महंगाई का असर अलग है?

जी, हां. महंगाई की सबसे अधिक मार पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लोगों पर पड़ी है. पश्चिम बंगाल में महंगाई रेट में सबसे अधिक 9.12 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. वहीं, मध्य प्रदेश में  9.10 प्रतिशत का वृद्धि हुआ है. हरियाणा में एक वर्ष में महंगाई 8.95 प्रतिशत बढ़ी है. महाराष्ट्र में महंगाई रेट 8.78 प्रतिशत हो गई है. इसके अतिरिक्त असम, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, यूपी और जम्मू कश्मीर में भी महंगाई रेट आठ प्रतिशत से अधिक रही.

इन राज्यों में सबसे अधिक महंगाई

पश्चिम बंगाल

9.12%

मध्य प्रदेश

9.10%

हरियाणा

8.95%

महाराष्ट्र

8.78% 

असम

8.54%

उत्तर प्रदेश

8.46%

गुजरात

8.20%

राजस्थान

8.12%

सोर्स: mospi  

इस बढ़ती महंगाई का क्या-क्या असर हो सकता है? 
महंगाई बढ़ने का कई चीजों पर असर होता है. जैसे बढ़ती महंगाई लोगों की क्रय शक्ति कम कर देती है. इसकी वजह से समग्र मांग कम हो जाती है. इससे बचत करने वाले को हानि होता है तो उधार देने वाले को लाभ होता है. 


सांसद अर्जुन सिंह ने थामा TMC का दामन

सांसद अर्जुन सिंह ने थामा TMC का दामन

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बीजेपी (BJP) को बड़ा झटका लगा है. रविवार को बीजेपी के लोकसभा सांसद अर्जुन सिंह (BJP MP Arjun Singh) कोलकाता में पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) में शामिल हुए हैं. जिसके बाद उन्होंने बीजेपी पर तंज कस्ते हुए बोला कि एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर राजनीति नहीं की जा सकती. उसके लिए जमीन पर उतरना पड़ता है. सिंह ने बीजेपी के दो सांसदों को भी इस्तीफा देने का अनुरोध किया है.

अर्जुन सिंह ने कहा, “जिस सियासी दल में दूसरे की तरफ उंगली दिखाने की प्रयास की जाती है, उसी बीजेपी में 2 सांसद TMC के आज भी वहां हैं जिन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है. मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि वे दोनों सांसद इस्तीफा दें. मुझे एक घंटा नहीं लगेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा.”सिंह ने कहा, “बंगाल बीजेपी केवल एयर कंडीशनर घर में बैठकर फेसबुक से बंगाल में राजनीति नहीं कर सकती. इसलिए बंगाल बीजेपी का दिन-प्रतिदिन ग्राफ गिर रहा है. जमीन स्तर पर राजनीति करना पड़ता है.

इससे पहले आज, बीजेपी के कामकाज पर असंतोष व्यक्त करते हुए, सिंह ने बोला था, “मैंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने अपनी राय रखी और उन्होंने बोला कि वह इस पर विचार करेंगे. बंगाल और केरल में भाजपा की कमियां हैं और यह पूरी पार्टी पर है कि वह उनसे कैसे निपटेगी, एक सांसद होने के नाते, मैं उन्हें पर्सनल स्तर पर नहीं देख सकता.

वहीं, पार्टी में अर्जुन सिंह का स्वागत करते हुए बनर्जी ने बोला कि, “सिंह ने “विभाजनकारी ताकतों” (भाजपा) को खारिज कर दिया और पार्टी में शामिल हो गए.

बनर्जी ने ट्वीट किया, “अर्जुन सिंह का गर्मजोशी से स्वागत, जिन्होंने बीजेपी में विभाजनकारी ताकतों को खारिज कर दिया और आज तृणमूल परिवार में शामिल हो गए. राष्ट्र भर के लोग पीड़ित हैं और उन्हें अब पहले से कहीं अधिक हमारी आवश्यकता है. आइए लड़ाई को जीवित रखें.

उधर, टीएमसी में शामिल होने के बाद बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह के आवास से बीजेपी के झंडे हटा दिए गए और टीएमसी के झंडे लगाए गए.