बलात्कार काण्ड के दोषी मृत्युदंड से बचने के लिए तरह-तरह के पैंतरे हुए

 बलात्कार काण्ड के दोषी मृत्युदंड से बचने के लिए तरह-तरह के पैंतरे हुए

दिल्ली बलात्कार काण्ड के दोषी मृत्युदंड से बचने के लिए तरह-तरह के पैंतरे अपना रहे हैं. दोषियों के एडवोकेट एपी सिंह ने उच्चतम न्यायालय में बोला कि विनय को कारागार में बहुत प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण वह मानसिक रूप से बीमार हो गया है. राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज करते समय उसके मानसिक रूप से बीमार होने के पहलू पर विचार नहीं किया.

वहीं,दूसरी तरफ सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विनय के एडवोकेट की दलीलों का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि विनय शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह फिट व स्वस्थ चित्त है. न्यायालय ने करीब दो घंटे तक जिरह सुनने के बाद विनय की याचिका पर शुक्रवार तक के लिए निर्णय सुरक्षित रख लिया. उच्चतम न्यायालय दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली विनय की याचिका पर शुक्रवार को निर्णय सुनाएगा.

गुरुवार को न्यायालय ने दोषी विनय शर्मा की राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की. विनय के एडवोकेट एपी सिंह ने दया याचिका खारिज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बोला कि उप गवर्नर ने दया याचिका प्रेषित करने की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए थे. एडवोकेट ने न्यायालय से फाइल दिखाने का आग्रह किया लेकिन न्यायालय ने मांग खारिज कर दी. परंतु सरकार की ओर न्यायालय मे ओरिजनल फाइल पेश की जिसे न्यायालय ने देखा. न्यायालय ने फाइल देखकर पाया कि उस पर दिल्ली सरकार के संबंधित मंत्री व उप गवर्नर के हस्ताक्षर थे.

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में निर्भया के साथ छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था. इनमें राम सिंह ने तिहाड़ कारागार में आत्म मर्डर कर ली थी व एक नाबालिग अपनी सजा पूरी कर चुकी है. दूसरी ओर विनय कुमार शर्मा, पवन कुमार गुप्ता, मुकेश सिंह व अक्षय सिंह ठाकुर को निचली न्यायालय के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय फांसी की सजा सुना चुका है.