WHO अधिकारी बोले- विश्व स्तर पर हावी हो रहा है डेल्टा COVID वेरिएंट

WHO अधिकारी बोले- विश्व स्तर पर हावी हो रहा है डेल्टा COVID वेरिएंट

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुख्य वैज्ञानिक ने शुक्रवार को कहा कि COVID-19 का डेल्टा संस्करण, जिसे पहली बार भारत में पहचाना गया था, इस बीमारी का विश्व स्तर पर प्रभाव बनता नजर आ रहा है। सौम्या स्वामीनाथन ने डब्ल्यूएचओ के प्रभावकारिता मानक को पूरा करने के लिए एक परीक्षण में क्योरवैक (5CV.DE) वैक्सीन की असफलता पर भी निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस अत्यधिक ट्रांसमिसिबल वेरिएंट के लिए अधिक शक्तिशाली वैक्सीन का जरूरत है।

ब्रिटेन ने डेल्टा संस्करण के साथ संक्रमण में भारी वृद्धि की सूचना दी है, जबकि जर्मनी के शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी ने भविष्यवाणी की है कि टीकाकरण दरों में वृद्धि के बावजूद यह तेजी से प्रमुख संस्करण बन जाएगा। वहीं, क्रेमलिन ने भी मॉस्को में रिकॉर्ड नए संक्रमणों के पीछ नए डेल्टा संस्करण को जिम्मेवार बताया है। तीसरी लहर की आशंकाओं को जताया गया।

स्वामीनाथन ने जिनेवा में संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'डेल्टा स्वरूप विश्व में कोविड-19 का सर्वाधिक प्रबल स्वरूप बनता जा रहा है क्योंकि इससे कहीं अधिक तेजी से संक्रमण का प्रसार होता है।'

उन्होंने आगे कहा क्योरवैक ने इस स्वरूप के बारे में बताया। जर्मनी की यह वैक्सीन डब्लूएचओ के 50 फीसद सफल रहने के बैंचमार्क को भी पार नहीं कर सकी। क्लिनिकल ट्रायल के दौरान इस वैक्सीन की प्रभावशीलता केवल 47 फीसदी ही आंकी गई। कंपनी ने कहा कि उसने अपनी अध्ययन आबादी के भीतर कम से कम 13 प्रकारों का दस्तावेजीकरण किया है। बता दें कि भारत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, रूस और सिंगापुर समेत दुनियाभर के कई देशों में डेल्टा वैरियंट ने तबाही मचाई हुई है।

डेल्टा ने भारत में दूसरी कोरोना लहर के दौरान जमकर उत्पात मचाया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका 'डेल्टा' नामकरण किया है। इसे कोविड-19 का चिंताजनक स्वरूप करार दिया है। एम्स के ताजा अध्ययन में दावा किया गया है कि डेल्टा वैरिएंट कोविड-19 वैक्सीन की एक या दोनों खुराक ले चुके लोगों में भी पाया गया है। कोरोना वायरस के डेल्टा वैरियंट को वैज्ञानिक भाषा में B.1.617.2 के नाम से जाना जाता है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.