ट्रंप और उनके सहयोगी अब फोन कर अधिकारियों पर डाल रहे दबाव, चुनाव परिणाम बदलने के लिए दे रहे निर्देश

ट्रंप और उनके सहयोगी अब फोन कर अधिकारियों पर डाल रहे दबाव, चुनाव परिणाम बदलने के लिए दे रहे निर्देश

वाशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी 2020 के चुनाव में हुई जो बाइडन की जीत को निष्प्रभावी करने के लिए अब मनमाने और निम्न स्तरीय कदम उठा रहे हैं। इन कदमों में वे मिशिगन में चुनाव से जुड़े अधिकारियों को फोन कर जीत के प्रमाण पत्र जारी न करने के लिए कह रहे हैं। पेनसिल्वेनिया में लोगों को पोपुलर वोटों को रद करने के लिए कोर्ट में जाने की सलाह दे रहे हैं। एरिजोना में मत सूचियों को प्रमाणित करने में देरी करने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाल रहे हैं।

चुनाव विशेषज्ञ ट्रंप और उनके सहयोगियों के इन कदमों को सत्ता में बने रहने की आखिरी कोशिश मान रहे हैं। इन लोगों का मानना है कि बाइडन जनवरी में निर्धारित समय पर ही राष्ट्रपति के ओवल ऑफिस पर काबिज हो जाएंगे। लेकिन ट्रंप इस समय जो कदम उठा रहे हैं उनसे अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में लोगों का विश्वास कम होने की आशंका पैदा हो गई है।

ट्रंप के मुखर आलोचकों में शुमार उटाह से सिनेटर मिट रोमनी ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि वह सरकारी अधिकारियों पर दबाव डालकर चुनाव परिणाम और लोगों की इच्छा को पलटने की कोशिश कर रहे हैं। यह किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति का सबसे बुरा और अलोकतांत्रिक प्रयास है।

अमेरिकी इतिहास में सर्वाधिक वोट पाने वाले राष्ट्रपति बने बाइडन

चुनाव पर नजर रखने वाली ट्रंप की अपनी एजेंसी ने भी 2020 के चुनाव को सुरक्षित और भेदभाव से परे करार दिया। लेकिन यह कहने पर ट्रंप एजेंसी के प्रमुख पर फट पड़े। ट्रंप के इन हताशा भरे कदमों के बावजूद परिणाम में बदलाव की कोई संभावना नहीं है। क्योंकि बाइडन अमेरिकी इतिहास में सर्वाधिक वोट पाने वाले राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बनकर उभरे हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोट भी प्राप्त कर लिए हैं। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस हकीकत को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। वह लगातार आधारहीन दावे कर रहे हैं और बाइडन की जीत की अनदेखी कर रहे हैं। इससे उनको और चुनाव को लेकर जनमानस में नकारात्मक छवि बनती जा रही है।


परमाणु बम बनाने की नई 'फैक्‍ट्री' बना रहा पाकिस्‍तान, सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा

परमाणु बम बनाने की नई 'फैक्‍ट्री' बना रहा पाकिस्‍तान, सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा

भारत से जारी तनाव के बीच पाकिस्तान अपनी परमाणु हथियारों की ताकत को बढ़ा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपने चश्मा परमाणु संयंत्र में परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम पृथक्करण केंद्र का काफी विस्तार किया है। पाकिस्तान सरकार ने अपने परमाणु संयंत्र के विकास कार्यक्रम को बेहद गुपचुप तरीके से 2018 के मध्य में शुरू किया था। अब हाल में ही मैक्सार टेक्नोलॉजी की सैटेलाइट तस्वीरों से यह खुलासा हुआ है कि सितंबर 2020 तक इस कार्यक्रम को पूरा कर लिया गया है। (तस्वीरें- Maxar Technologies)

परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम पृथक्करण केंद्र बना रहा पाक

दुनियाभर के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने वाली संस्था इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के चश्मा परमाणु संयंत्र में प्लूटोनियम के रिप्रोसेसिंग प्लांट को साल 2007 में ही पहचान लिया गया था। हालांकि, 2015 में पाकिस्तान इस परमाणु संयंत्र को चालू कर पाया था। चश्मा एक्सटेंशन प्लांट में परमाणु बम को बनाने के लिए ज्यादा मात्रा में प्लूटोनियम को इकट्ठा किया जा रहा है। (तस्वीरें- Maxar Technologies)

चीन की मदद से पाकिस्तान ने विकसित किया परमाणु संयंत्र

चश्मा परमाणु संयंत्र को पाकिस्तान ने कनाडा की मदद से 1972 में शुरू किया था। इस संयंत्र में चार 300 मेगावाट के प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर ऑपरेशनल हैं। जिसमें से 2, 3 और चार को चीन की मदद से शुरू किया गया है। अब पाकिस्तान इस संयंत्र में भारी मात्रा में प्लूटोनियम का निर्माण कर रहा है। जिसका इस्तेमाल भविष्य में परमाणु बम को बनाने के लिए किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान परमाणु नियामक प्राधिकरण इस केंद्र की देखरेख करती है।

कहां स्थित है पाकिस्तान का चश्मा परमाणु संयंत्र

चश्मा परमाणु संयंत्र पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से लगभग 250 किलोमीटर दूर मियांवाली जिले में स्थित है। यह संयंत्र पाकिस्तान और चीन के बीच परमाणु हथियारों और ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का उदाहरण है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान बिजली की गंभीर कमी से जूझ रहा था। इसलिए पाकिस्तान इन रिएक्टरों की मदद से बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन की योजना भी बना रहा है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए परमाणु संयंत्रों पर ही आश्रित होना चाहता है क्योंकि उसके पास हाइड्रो पावर से बिजली बनाने के संसाधन सीमित हैं।

भारत-पाक दोनों के परमाणु बम काफी ताकतवर

आज दुनिया के पास इससे कई गुना ज्यादा क्षमता वाले परमाणु बम हैं। ऐसे में परमाणु युद्ध की कल्पना ही कंपा देती है। भारत और पाकिस्तान दोनों के पास न्यूक्लियर हथियार को ले जाने वाले मिसाइल हैं। खास बात यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के आखिरी कोने तक हमले की क्षमता वाले मिसाइल विकसित कर चुके हैं। भारत के पास तो 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल है, जो पाकिस्तान के बाहर भी हमला करने की क्षमता रखती है। पाकिस्तान के पास भी न्यूक्लियर हथियार ले जाने वाले मिसाइल है, जो 2,750 किलोमीटर तक लक्ष्य साध सकता है।

चीन, पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा एटम बम

SIPRI के मुताबिक चीन के पास भारत से दोगुने 320 ऐटमी हथियार हैं जबकि पाकिस्तान के पास 160 परमाणु वेपन है। भारत के पास 150 परमाणु हथियार है। चीन ने पिछले एक साल में 30 परमाणु हथियार बढ़ाए हैं, वहीं भारत ने 10 एटम बम। भले ही चीन और पाकिस्तान के पास भारत के मुकाबले परमाणु हथियार ज्यादा हों लेकिन नई दिल्ली अपने न्यूक्लियर वेपन की क्षमता को लेकर आश्वस्त है। यही नहीं, भारत लगातार अपने एटमी हथियारों को उन्नत कर रहा है। जमीन से हवा तक भारत की एटमी ताकत बेहद मजबूत है।


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