आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम स्कीन विकसित, जाने खासियत

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम स्कीन विकसित, जाने खासियत

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी (RMIT University) के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम स्कीन विकसित की है नयी ईजाद हुई आर्टिफिशियल स्कीन (Artificial electronic skin) का निर्माण किया है जो अलग पस्थितियों और मौसम में इंसानों की स्कीन की तरह प्रतिक्रिया (React) देती है

 शोधकर्ताओं का दावा है कि उनकी बनाई यह स्कीन दर्द के प्रति बिलकुल वैसी संवेदना दिखाती है जैसा की मानवीय स्कीन दर्द में दिखाती है इसकी सबसे खास बात यह है कि वह उसी द्रुत गति से प्रतिक्रिया देती है जैसे हमारे दिमाग का नर्वस सिस्टम कार्य करता है

प्रोजेक्ट हेड ने दी जानकारी
RMIT प्रोफेसर और सिलिकॉन रबर से बनी आर्टिफिशियल स्किन के इस प्रोजेक्ट की प्रतिनिधित्व भारतीय मूल की इंजीनियर और रिसर्चर मधु भास्करन ने की थी उन्होंने बताया कि यह दर्द संवेदी प्रोटोटाइप अगली पीढ़ी के बायोमेडिकल तकनीकी और इंटेलिजेंट रोबोटिक्स की दिशा में बहुत बड़ा कदम है उन्होंने कहा, 'हमारे शरीर की स्कीन सबसे संवेदनशील अंग है जिसमें बहुत जटिल ढंग से डिजाइन हुआ सिस्टम है ये तंत्र किसी भी वस्तु के सम्पर्क में आने पर तेजी से चेतावनी इशारा पहुंचाने का कार्य करता है '

नई तकनीक के बारे में बात करते हुए मधु भास्करन ने कहा, 'हमारी कृत्रिम स्कीन तुरंत ही प्रतिक्रिया देती है जब दबाव, गर्मी और ठंडे की असर एक स्तर से अधिक हो जाता है '

प्रोस्थेटिक्स चिकित्सा विज्ञान में कारगर
इस नयी स्कीन की ईजाद को मेडिकल साइंस क्षेत्र का नया वरदान माना जा रहा है भविष्य में प्रोस्थेटिक्स और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में ये आर्टिफिशियल स्किन बहुत उपयोगी साबित होगी प्रोस्थेटिक्स चिकित्सा विज्ञान का वह क्षेत्र है, जिसमें लोगों की अंग बेकार होने पर उस अंग की स्थान कृत्रिम अंगों को लगाया जाता है इसके अतिरिक्त प्लास्टिक सर्जरी से लोगों के चहेरे बदलने के क्षेत्र में यह खोज बहुत उपयोगी हो सकती है


क्या गांजे को करे दें लीगल, जनता से पूछा गया सवाल

क्या गांजे को करे दें लीगल, जनता से पूछा गया सवाल

पूरे यूरोप में फ़्रांस में गांजे (कैनाबिस) के खिलाफ सबसे सख्त कानून हैं। इसके बावजूद पूरे यूरोप में फ़्रांस में सबसे ज्यादा गांजे का उपभोग होता है। गांजा-भांग पर कानून के डंडे से रोक लगा पाने में असफल रहने पर अब फ़्रांस के सभी दलों के सांसदों ने इस मसले पर जनता की राय लेने का अभियान चलाया है।

गांजे को लीगल करने पर विचार
फ़्रांस के ढेरों सांसदों का मानना है कि देश के राजनीतिक वर्ग को गांजे को लीगल करने के बारे में सोचना चाहिए। इसी मंशा के चलते फ़्रांस की नेशनल असेम्बली की वेबसाइट पर 13 जनवरी को जनता की राय मांगने का कंसल्टेशन पेपर जारी किया गया। देखते देखते पौने दो लाख लोगों ने अपनी राय वेबसाइट पर डाल भी दी। आमतौर पर ऐसी रायशुमारी में औसतन 30 हजार जवाब ही आते हैं।

गांजा लीगल किया जाये कि नहीं इस पर जनता की राय 28 फरवरी तक ली जायेगी। इस रायशुमारी के दो मकसद हैं – ये जानना कि फ्रेंच नागरिकों के गांजे के बारे में क्या विचार हैं और लोग गांजा-भांग पर किस तरह की सरकारी पॉलिसी चाहते हैं। लोगों की क्या राय है इसे अप्रैल में प्रकाशित किया जाएगा।

फ्रेंच प्रेसिडेंट इमानुएल माक्रों की पार्टी की सांसद कैरलाइन जनिविएर का कहना है कि जनता की राय जानने से हमें बहुत फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जनता की राय पता करके शायद इस बात की पुष्टि हो सकेगी कि फ़्रांस का राजनीतिक वर्ग मजे के लिए कैनाबिस के इस्तेमाल के प्रति काफी कम सहानुभूति वाला रुख रखता है, जबकि जनता का रुख इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि हर साल फ़्रांस 568 मिलियन यूरो गांजे की तस्करी रोकने पर खर्च करता है। इसको देखने की जरूरत है।

फ़्रांस की सरकारों ने हमेशा ही गांजे को अपराध की श्रेणी से बाहर लाने की मजबूत खिलाफत की है। 2019 में जब प्रधानमंत्री कार्यालय के आर्थिक सलाहकार ग्रुप ने ‘नशाबंदी पर असफलता’ की रिपोर्ट प्रकाशित की और गांजे को कानूनी वैधता देने का प्रस्ताव किया तो सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दिखाई। हेल्थ मिनिस्टर एग्नेस बुज्य्न ने सार्वजानिक तौर पर कहा कि वे गांजे के खिलाफ हैं। सितम्बर 2020 में आन्तरिक मंत्री गेराल्ड दर्मनिन ने कफा था कि हम इसे लीगल करने नहीं जा रहे।

यहां होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
पूरे यूरोप में फ़्रांस ही ऐसा देश है जहाँ गांजा सबसे ज्यादा उपभोग किया जाता है। 2016 में 15 से 64 वर्ष के फ्रेंच नागरिकों में से 41 फीसदी ने कम से कम एक बार गांजा जरूर पिया था। यूरोप में ये आंकड़ा 18.9 फीसदी का है।


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