भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.


तालिबानी आतंकवादियों में संघर्ष की समाचार हकीकत या झूठ? Mullah Baradar को खोलनी ही पड़ी जुबान

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काबुल: हक्कानी (Haqqani) गुट के साथ जंग में घायल होने की खबरों पर आज तालिबान (Taliban) ने आधिकारिक रूप से तालिबानी सरकार के उप-प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर (Mullah Baradar) के अफगानिस्तान के सरकारी चैनल RTA पश्तो को दिए गए साक्षात्कार को जारी किया है साक्षात्कार में मुल्ला बरादर हक्कानी गुट के साथ जंग की खबरों का खंडन कर रहा है और बता रहा है कि तालिबान में कोई आपसी संघर्ष नहीं चल रहा, सब एक परिवार का भाग हैं

साथ ही कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री के अफगानिस्तान दौरे में शामिल ना होने पर मुल्ला बरादर ने बोला कि उसे पता ही नहीं था कि कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री अफगानिस्तान के दौरे पर आ रहें हैं अन्यथा वो जरूर उपस्थित रहता

सवाल- मुल्ला बरादर अखुंद साहब आपके आपसी जंग में घायल होने और कई स्थान मृत्यु की खबरें भी मीडिया में दिखाई जा रही हैं आपका इस पर बोलना है क्या ये हकीकत है?

मुल्ला बरादर- नहीं ये हकीकत नहीं है जो आजकल खबरें फैलाई जा रही हैं कि हमारे बीच आपसी जंग चल रही है (बरादर गुट और हक्कानी गुट के बीच में) और मैं घायल हूं, ये सरासर गलत है हम एक परिवार की तरह हैं और प्यार-मोहब्बत से एक साथ कार्य कर रहे हैं मैं एक स्थान कार्य से यात्रा पर गया हुआ था जहां मीडिया उपस्थित नहीं था

सवाल- अभी कुछ दिन पहले कतर के विदेश मंत्री काबुल के दौरे पर आए थे लेकिन आप उसमें उपस्थित नहीं थे

मुल्ला बरादर- कतर के विदेश मंत्री के अफगानिस्तान के दौरे पर आने की जानकारी मुझे नहीं थी यदि मुझे पता होता कि वो आ रहे हैं तो मैं अपने यात्रा को कैंसिल करके उनके साथ मीटिंग में जरूर शामिल होता

सवाल- इस साक्षात्कार के लिए आपका शुक्रिया आप आखिर में कुछ बोलना चाहते हैं

मुल्ला बरादर- इससे पहले जब कतर में हमारे बीच शांति मीटिंग हो रही थी तब भी कुछ मीडिया अपने फायदे के लिए ऐसे ही असत्य दिखाती थी जैसा कि आज दिखा रहे हैं मैं मीडिया से दरख्वास्त करना चाहता हूं कि वो हकीकत दिखाएं ना कि अपने फायदे के लिए झूठ ये ठीक नही है साक्षात्कार के लिए आपका भी शुक्रिया