हांगकांग में चीन के राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कसा श‍िकंजा, संपादकों को नहीं मिली जमानत

हांगकांग में चीन के राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कसा श‍िकंजा, संपादकों को नहीं मिली जमानत

हांगकांग, रायटर। हांगकांग में गिरफ्तार किए गए एपल डेली के चीफ एडीटर और सीईओ सहित पांच संपादकों को अदालत ने जमानत नहीं दी है। गिरफ्तारी के बाद यह उनकी पहली सुनवाई थी। अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी। चीन के अ‌र्द्ध-स्वायत्त क्षेत्र हांगकांग में मीडिया पर यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। डेली एपल के चीफ एडीटर रेयान ला, सीईओ चुइंग किम हंग सहित पांच संपादकों को गुरुवार को अखबार के कार्यालय में छापा मारकर गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के साथ ही अखबार के सभी कंप्यूटर जब्त किए गए

यहां छापे में पांच सौ पुलिसकर्मी थे। इनकी गिरफ्तारी के साथ ही अखबार के सभी कंप्यूटर जब्त कर लिए गए। इन सभी पर विदेशी ताकतों से मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इनको पुलिस रिमांड पर दिया गया है।इससे पहले एपल डेली के संस्थापक जिमी लाइ पहले से ही 2019 के आंदोलन के मामले में गिरफ्तार कर लिए गए थे। उन्हें बीस माह की सजा दी गई है। अखबार के खिलाफ कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है।

क्‍या है चीन का राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून

चीन की संसद ने 1 जुलाई, 2020 को हांगकांग के लिए विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पारित किया था। दुनिया भर में इस कानून के खिलाफ आक्रोश और हांगकांग में विरोध को अनदेखी करते हुए चीन ने यह कदम उठाया था।
1 जुलाई को ब्रिटिश शासन से चीन को शहर के हवाले करने की 23 वीं वर्षगांठ पर इस कानून के लागू किया गया। दुनियाभर के आलोचकों का मानना है कि इस कानून से अर्धस्वायत्त क्षेत्र में मानवाधिकार पर गंभीर असर पड़ेगा। इसमें हांगकांग की राष्ट्रीय सुरक्षा, अपराधों और दंड, अधिकार क्षेत्र और कानून प्रवर्तन के प्रावधान शामिल हैं।
मसौदा दस्तावेज में राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में चीनी अधिकारियों की मुख्य जिम्मेदारियों की सूची है। इस कानून के तहत इसे बनाए रखने के लिए हांगकांग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
आलोचकों का कहना है कि यह कानून हांगकांग निवासियों को एक देश दो प्रणाली समझौते के तहत मिलने वाली नागरिक स्वतंत्रता को खत्म कर देगा। यूनाइटेड किंगडम ने 1997 में चीन को वापस क्षेत्र सौंप था, तब से यह समझौता लागू है।
यह हांगकांग में एक सुपर कानून की तरह काम करेगा। कानून में कहा गया है कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के त‍हत जब लोग अपने कर्तव्‍यों का पालन कर रहे होंगे तो इस पर हांगकांग सरकार को कोई नियंत्रण नहीं होगा। राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून से जुड़े स्‍टाफ हांगकांग सरकार के नियंत्रण में नहीं रहेंगे।
इस कानून में आतंकवाद की नई परिभाषा गढ़ी गई है। राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के अनुसार यदि हांगकांग में प्रदर्शनकारी राजनीतिक उद्देश्‍यों के लिए चीन की सरकार पर दबाव बनाने के लिए सार्वजनिक परिवहन में आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उनका यह कृत्‍य आतंकवाद की श्रेणी में होगा। यह आतंकवादी घटना मानी जाएगी। ऐसे समय राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून अपना काम करेगा।
इस एक्‍ट में तीन परिस्थितियों का जिक्र किया गया है। ये तीन स्थितियां निम्‍न है -पहला, आंतरिक मामलों में विदेश हस्‍तक्षेप के खिलाफ, बहुत गंभीर मामले, राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने पर। इस एक्‍ट में बहुत गंभीर मामलों को विवेचना का अधिकार चीन की कम्‍युनिस्‍ट सरकार के पास होगा। वह किसी भी मामले को गंभीर की श्रेणी में रख सकती है। इस एक्‍ट के तहत नेताओं या गंभीर अपराधियों को आजीवन कारावास या न्‍यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.