ग्रीन कार्ड के लिए देशों का तय कोटा खत्म होगा, वेटिंग लिस्ट में शामिल भारतीयों को फायदा

ग्रीन कार्ड के लिए देशों का तय कोटा खत्म होगा, वेटिंग लिस्ट में शामिल भारतीयों को फायदा

अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार को एकमत से फेयरनेस फॉर हाई स्किल्ड इमीग्रेंट्स एक्ट पास कर दिया। इससे कई दशकों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों की उम्मीद बढ़ गई है। इस एक्ट के जरिए अमेरिका ने हर साल जारी किए जाने वाले ग्रीन कार्ड की लिमिट खत्म कर दी है।

इस बिल के पास होने से H1B वीजा पर अमेरिका गए भारतीय प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत मिली है। यह प्रोफेशनल लंबे समय से अमेरिकी रेजिडेंट बनने के लिए ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे थे। यह बिल अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेन्टेटिव्स ने 10 जुलाई 2019 को पास किया था। अब इसे सीनेट की भी मंजूरी मिल गई। इसे रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने स्पॉन्सर किया था।

फैमिली बेस्ड वीजा की लिमिट बढ़ेगी

इस बिल के पास होने से फैमिली बेस्ड वीजा की लिमिट भी बढ़ जाएगी। मौजूदा समय में किसी भी देश को कुल 15% वीजा जारी किए जाते हैं। इसमें से 7% वीजा परिवार के आधार पर जारी किए जाते हैं। इसके अलावा इस बिल से रोजगार के आधार पर दिए जाने वाली वीजा पर लगी 7% की लिमिट भी हट जाएगी।

अमेरिका की इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी

भारतीय-अमेरिकन राजा कृष्णमूर्ति सदन में इस बिल के को-स्पांसर थे। कृष्णमूर्ति के मुताबिक, यह कानून ग्रीन कार्ड के लिए कई साल से वेटिंग लिस्ट में शामिल लोगों को राहत देगा। उनका वेटिंग टाइम कम होने से अमेरिकी इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि मुझे खुशी है कि दोनों पार्टियों के सीनेटरों ने हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दुनिया भर से प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए इस बिल को पास कर दिया। यह कानून भेदभाव को खत्म कर हाई स्किल्ड लोगों को एकसमान मौके देगा। इससे अमेरिकी कंपनियों की टेलेंटेड लोगों को अपने साथ बनाए रखने में मदद मिलेगी। मैं अपने साथियों और राष्ट्रपति से अपील करता हूं कि इन सुधारों को हकीकत बनाने के लिए आखिरी कदम उठाएं।

10 साल के लिए बनता है ग्रीन कार्ड

दूसरे देशों से काम करने आने वालों को अमेरिका ग्रीन कार्ड जारी करता है। इसकी वैलिडिटी 10 साल होती है। इसके बाद इसे रिन्यू कराना होता है। यह एक तरह से अमेरिका का परमानेंट रेजिडेंट कार्ड है। इसका रंग हरा होता है, इसलिए इसे ग्रीन कार्ड कहा जाने लगा।

ग्रीन कार्ड के लिए लंबी वेटिंग

अब तक अमेरिका ने हर देश के लिए सात प्रतिशत का कोटा तय कर रखा था। बाकी लोग वेटिंग लिस्ट में चले जाते थे। समय के साथ वेटिंग लिस्ट लंबी होती गई। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख लोग ऐसे हैं जो ग्रीन कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। नए कानून से यह लिमिट हट जाएगी। अब मेरिट के आधार पर ग्रीन कार्ड मिला करेगा।


फिलिस्तीन में 14 साल बाद होने जा रहा है राष्ट्रीय चुनाव

फिलिस्तीन में 14 साल बाद होने जा रहा है राष्ट्रीय चुनाव

नई दिल्ली: फिलिस्तीन में 14 साल बाद फिर से राष्ट्रीय चुनाव कराने जा रहा है। इनमें संसदीय, राष्ट्रपति और राष्ट्रीय परिषद के चुनाव शामिल हैं। ये सभी चुनाव इसी वर्ष होंगे।

फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा हस्ताक्षरित एक डिक्री के तहत, संसदीय चुनाव 22 मई को, 31 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव और 31 अगस्त को होंगे।

बताया गया, “राष्ट्रपति ने चुनाव समिति और राज्य के सभी राज्य शिक्षार्थियों को निर्देश दिया कि वे मातृभूमि के सभी शहरों में एक लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया शुरू करें।”

जानें क्या है वजह
इजरायल और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार के बीच 2014 में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति वार्ता का अंतिम दौर टूट गया था।

1967 के मध्य पूर्व युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम को जब्त कर लिया था और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद उन्हें नियंत्रित करे रखा था।

फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी के रूप में इन जमीनों पर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहते हैं।

इजरायल के वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार की वजह से 2014 में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति वार्ता प्रभावित हुई थी।

1967 के मध्य पूर्व युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम को जब्त कर लिया था और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद उन्हें नियंत्रित करे रखा। जबकि फिलिस्तीनी इन जमीनों पर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहते हैं।

इजरायल ने अभी तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य का नहीं दिया है दर्जा
चरमपंथी सुन्नी गुट हमास फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इस गुट का गाजा पट्टी पर नियंत्रण है।

इजरायल ने अभी तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य का दर्जा नहीं दिया है। इजरायल हमास को आतंकी संगठन मानता है और गाजा पट्टी से इजरायल पर होने वाले किसी भी हमले के लिए हमास को जिम्मेदार मानता है।

पिछले साल दिसंबर में भी गाजा की तरफ से इजरायल पर रॉकेट से हमला किया गया था, जिसका इजरायल एयरफोर्स ने करारा जवाब दिया था। जवाबी कार्रवाई में रॉकेट बनाने की साइट, कई भूमिगत निर्माण और एक सैन्य पोस्ट ध्वस्त हो गई थी।


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