चीन ने बनाया ये अजूबा, बर्फ की बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ देख हिल गए लोग

चीन ने बनाया ये अजूबा, बर्फ की बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ देख हिल गए लोग

बीजिंग: कोरोना की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद चीन हार्बिन इंटरनेशनल आइस एंड स्नो फेस्टिवल की तैयारी में जुटा हुआ है। आपको बता दें कि चीन में यह फेस्टिवल 5 जनवरी से फरवरी के अंत तक मनाया जाता है। स्नो कार्निवल की सजावट पूरी दुनिया से आए पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस सुंदर दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग हार्बिन इंटरनेशनल आइस एंड स्नो फेस्टिवल में शामिल होते है। इस फेस्टिवल में बर्फ से महल, मूर्तियां और अन्य चीजें बनाई जाती हैं। इतना ही नहीं स्नो कार्निवल में लगी रंग-बिरंगी लाइटें शहर की खुबसूरती में चार चांद लगा देता है।

चीन में हर वर्ष मनाया जाता है स्नो फेस्टिवल
आपको बता दें कि चीन में हार्बिन इंटरनेशनल आइस एंड स्नो फेस्टिवल आधिकारिक तौर पर हर वर्ष 5 जनवरी से 5 फरवरी तक चलता है। इस फेस्टिवल में कलाकारों द्वारा बर्फ की सुंदर मूर्तियों और डिजाइन किए गए शानदार प्रतिष्ठानों का कार्निवल बनाया जाता है। हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में कलाकारों ने सोंगहुआ नदी से निकाली गई बर्फ से कई बेहतरीन डिजाइन बनाए हैं, जिन्हें पर्यटक खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं उत्तरी चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत के हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में घूमने आए पर्यटकों के लिए आकर्षण के कई केंद्र हैं। यहां की मनमोहक तस्वीरें पर्यटकों को लुभा रही हैं।

110,000 घन मीटर बर्फ से की गई है संरचना
चीन के हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में बर्फ की संरचनाओं का निर्माण 110,000 घन मीटर बर्फ से किया गया है, जिसमें सबसे पहले एक पर्यटक बर्फ से बना पियानो बजाते हुए दिखाया गया। वहीं, हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में बर्फ के विशाल महल और सुंदर मूर्तियां बनाई गई हैं। इतना ही नहीं,इनमें 3डी लाइट शो को भी लगाया है, जिससे इसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है।

12 देशों के बर्फ मूर्तिकारों ने तैयार किया स्नो वर्ल्ड
हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में 12 देशों के बर्फ मूर्तिकार बर्फ की मूर्तियों और बड़े-बड़े महलों को बनाने में भाग लेते हैं। ये बड़ी संख्या में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यह लगभग 600,000 वर्ग मीटर में फैला है और इसमें 100 से भी ज्यादा आकर्षक जगहें शामिल हैं, जहां पर्यटक घूम सकते हैं। अगर आप चीन के हार्बिन आइस एंड स्नो वर्ल्ड में बर्फ की बड़ी-बड़ी मूर्तियों और महलों को देखने के लिए एंट्री लेना चाहते हैं तो आपको 48 डॉलर या 3543 रुपये चुकाने होंगे। मेस्कॉट योडली की मूर्ति को चीन में आयोजित हार्बिन इंटरनेशनल आइस एंड स्नो स्कल्प्चर फेस्टिवल में बर्फ के एक महल के सामने लगाया गया।


व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस की कोविड-19 वैक्सीन AK-47 जितनी भरोसेमंद

व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस की कोविड-19 वैक्सीन AK-47 जितनी भरोसेमंद

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बोला है कि रूस की Covid-19 वैक्सीनें AK-47 की तरह भरोसेमंद हैं. न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार रूस ने अब तक की चार वैक्सीनों को स्वीकृति दे दी है. TASS ने पुतिन के हवाले से लिखा, वे AK-47 जितनी भरोसेमंद हैं. यह हम नहीं, एक यूरोपियन स्पेशलिस्ट ने बोला है और मुझे लगता है कि वह पूरी तरह ठीक है.' AK-47 दुनिया में सबसे अधिक इस्तेला किए जाने वाले हथियारों में से एक है.

एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान उपप्रधानमंत्री तात्याना गोलिकोवा ने पुतिन के हवाले से बताया, 'हमारा मेडिकेशन ऐसी तकनीक और प्लैटफॉर्म पर आधारित है जिसे दशकों से इस्तेमाल किया जा रहा है. वे बहुत मॉडर्न और अप-टू-डेट हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे सबसे अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित है.'


एक खुराक की वैक्सीन मंजूर
इससे पहले रूस ने Covid-19 रोधी अपने टीके Sputnik V की एक-खुराक वाले संस्करण को बृहस्पतिवार को यह तर्क देते हुए नियामक स्वीकृति प्रदान कर दी कि इस कदम से कोविड-19 वायरस के विरूद्ध सामूहिक प्रतिरक्षा प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है. टीके के इस संस्करण का नाम 'स्पूतनिक लाइट' है और यह दो-खुराक वाले Sputnik V की पहली खुराक के समान है. इसे अभी तक स्थापित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुरूप इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उन्नत परीक्षण पूरा करना बाकी है.




वायरस के विरूद्ध मजबूती
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक रूस ने जनवरी में 'स्पूतनिक लाइट' का मानव परीक्षण प्रारम्भ किया था और शोध अभी भी जारी हैं. 'स्पूतनिक लाइट' रूस में स्वीकृत चौथा घरेलू विकसित Covid-19 रोधी टीका है जिसे देश में स्वीकृति दी गई है. रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने बोला कि चौथे टीके को अधिकृत करने से वायरस के विरूद्ध सामूहिक प्रतिरक्षा बनाने की प्रक्रिया को गति देने में सहायता मिलेगी. अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि Covid-19 के विरूद्ध सामूहिक प्रतिरक्षा हासिल करने के लिए कम से कम 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण आवश्यक है, लेकिन सटीक सीमा अभी भी अज्ञात है.


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