ट्रंप बनाएंगे अलग पार्टी! राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के दिए संकेत

ट्रंप बनाएंगे अलग पार्टी! राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के दिए संकेत

नई दिल्ली: अमेरिका की सत्ता हाथ से जाने के बाद और व्हाइट हाउस से विदा लेने के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन पर हमला बोला। एक कार्यक्रम में शामिल होने आए डोनाल्ड ट्रंप ने उन अटकलों पर भी बात रखी, जिनमें कहा जा रहा था कि वो नई पार्टी बनाएंगे।

बाइडन सरकार पर साधा निशाना
महाभियोग की जांच में बरी होने के कुछ हफ्ते बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में आयोजित हुई सीपीएसी (कन्जर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस) 2021 की मीटिंग में हिस्सा लिया और इस दौरान बाइडन प्रशासन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति ‘अमेरिका लास्ट’ में पहुंच गई है। ट्रंप ने राष्ट्रपति जो बाइडन के शुरुआती फैसलों खास कर प्रवासी नीति की कड़ी आलोचना की।


राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के दिए संकेत
उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत भीड़ से यह पूछ कर की कि क्या आपने मुझे याद किया? इसके जवाब में उनके समर्थकों ने उतावले अंदाज में हां में जवाब दिया। इस दौरान ट्रंप ने एक बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव में धांधली होने की बात को दोहराया। साथ ही 2024 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के संकेत भी दिए। उन्होंने बैठक में कहा कि आज से चार पहले हमने जो यात्रा शुरू की थी, वो अभी खत्म नहीं हुई है।

नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे डोनाल्ड ट्रंप?
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह झूठी खबर है। उन्होंने कहा अगर हम नई पार्टी बनाते हैं तो हमारे वोट बंट जाएंगे और हम कभी जीत नहीं पाएंगे। ट्रंप ने कहा कि हम लोग सभी रिपब्लिकन पार्टी के हैं और पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत और एकजुट होगी।

उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में फिर धांधली होने की बात को दोहराते हुए कहा कि हम चुनाव में जीते थे, लेकिन डेमोक्रेट्स ने धांधली की। कौन जानता है कि तीसरी बार भी हम उन्हें हरा दें। ट्रंप ने कहा हम सब जानते हैं कि बाइडन प्रशासन क्या करने वाला है, लेकिन इस हद तक इस सरकार में बुरा होगा इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। यह सरकार इस हद तक वामपंथी एजेंडे के साथ जाएगी, ये किसी ने कल्पना नहीं की थी।


चीनी समर्थन वाले कोलंबो सिटी पोर्ट को लेकर मचे बवाल पर मंत्री की सफाई, बोले...

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नई दिल्ली: श्रीलंका ( Sri Lanka ) में चाइना के विरूद्ध भारी विरोध प्रारम्भ हो गया है. श्रीलंका की सरकार बेपरवाह होकर पिछली गलतियों से सबक नहीं लेते हुए चाइना ( China ) के साथ करार कर रही है, लेकिन श्रीलंका की जनता और सिविल सोसाइटी की ओर से श्रीलंका में चाइना के विरूद्ध भारी विरोध प्रारम्भ हो चुका है.

श्रीलंका में सिविल सोसाइटी, विपक्ष, लेबर यूनियन और आम जनता की तरफ से श्रीलंकन उच्चतम न्यायालय में दर्जनों याचिकाएं डाली गई हैं, जिसमें श्रीलंका के कोलंबो ( Colombo ) में बनने वाले चीनी पोर्ट सिटी ( Port City ) का विरोध किया जा रहा है. इस बीच मंत्री सब्री ने मुद्दे में सरकार की ओस से सफाई दी है.

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में चाइना सिटी पोर्ट बनाने वाला है, जिसका श्रीलंका में भारी विरोध किया जा रहा है. श्रीलंका के लोगों का बोलना है कि सरकार ने देश की संप्रभुता को ताक पर रखकर चाइना के साथ समझौता किया है. श्रीलंकन उच्चतम न्यायालय में अब सोमवार को तमाम याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी.

इस बीच सरकार के मंत्री सब्री ने बोला है कि, निवेश क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 269 हेक्टेयर और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 91 हेक्टेयर है. उन्होंने बोला कि परियोजना का स्वामित्व चीनी कंपनी को नहीं दिया जा सकता है.

सब्री ने बोला कि वित्तीय क्षेत्र की शेष भूमि में से 116 हेक्टेयर या 43 फीसदी परियोजना कंपनी को दी जाएगी, जिसने 2013 में परियोजना प्रारम्भ की थी और पोर्ट सिटी को विकसित करने के लिए 1.4 बिलियन अमरीकी डालर खर्च किए थे.

उन्होंने बोला कि सभी 100 प्रतिशत भूमि सरकार के स्वामित्व में है. यह बोलना पूरी तरह से गलत है कि भूमि किसी और को दी गई थी.

ये है मामला
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि श्रीलंका की महिन्द्रा राजपक्षे सरकार ने पिछले सप्ताह श्रीलंकन संसद में कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन नाम का एक बिल पेश किया है.

इस बिल में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में समंदर किनारे 1 अरब 40 करोड़ रुपए की लागत से एक पोर्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव है.

इसके बाद इस बिल का पूरे श्रीलंका में भारी विरोध किया जा रहा है. श्रीलंका के लोगों का बोलना है कि इस बिल के जरिए श्रीलंका में चाइना को असीमित शक्तियां दी जा रही हैं और ये बिल श्रीलंका की संप्रभुता के लिए खतरा है.
इस बिल से श्रीलंका की संप्रभुता का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है, लिहाजा ये बिल रद्द होना चाहिए.


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