World Brain Tumor Day 2020: कैसे होती है ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत, जानें

World Brain Tumor Day 2020: कैसे होती है ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत, जानें

विश्वभर में ब्रेन ट्यूमर के मरीज़ों की संख्या हर साल तेज़ी से बढ़ रही है। इसलिए लोगों को इस घातक बीमारी के बारे में जागरुक करने के लिए हर साल 8 जून को वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे मनाया जाता है। ब्रेन ट्यूमर सामान्य कैंसर की तरह नहीं होता, ऐसे में इसके लक्षणों की जानकारी आम लोगों में होना बेहद ज़रूरी है। विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाने के पीछे की एक वजह इस गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सामना बेहतर और प्रभावी तरीके से करने का हौसला देना भी है।

आइए जानें ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब!

क्या सभी ब्रेन ट्यूमर एक जैसे होते हैं?

नहीं सभी ब्रेन ट्यूमर एक जैसे नहीं होते। मस्तिष्क में किसी भी चीज़ में वृद्धि होना बहुत ख़तरनाक माना जाता है और यह बात ब्रेन ट्यूमर के मामले में भी लागू होती है। ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं, हालांकि इसे कैंसर के आधार पर मुख्य रूप से दो वर्गों- कैंसरजन्य और कैंसर रहित ट्यूमर में बांटा जा सकता है। बीस से चालीस साल के लोगों को ज़्यादातर कैंसर रहित और 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को ज़्यादातर कैंसर वाले ट्यूमर होने की संभावना रहती है। कैंसर रहित ट्यूमर, कैंसर वाले ट्यूमर की तुलना में धीमी गति से बढ़ता है।

क्या मस्तिष्क में गांठ ब्रेन ट्यूमर या कैंसर होने के संकेत हैं?

नहीं, ट्यूमर को आमतौर पर कैंसर से जोड़कर देखा जाता है, हालांकि हर ट्यूमर कैंसर के लिए जिम्मेदार नहीं होता, फिर भी यह बहुत घातक होता है। ब्रेन ट्यूमर बहुत ही खतरनाक बीमारी है, यह सिर्फ मस्तिष्क को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर पूरे शरीर पर होता है, क्योंकि मस्तिष्क ही पूरे शरीर को संचालित करती है।

क्या सभी ब्रेन ट्यूमर के कारण और लक्षण एक ही तरह होते हैं?

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण सीधे संबंधित होते हैं जहां दिमाग के अंदर ट्यूमर होता है। ट्यूमर का आकार बढ़ने के परिणास्वरूप मस्तिष्क पर बहुत दबाव पड़ता है। इसी वजह से सिरदर्द, उल्टी आना, जी मचलना, दृष्टि संबंधी समस्याएं या चलने में समस्या, बोलते समय समस्या होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। कभी-कभी ट्यूमर की वजह से सिर में पानी इकट्ठा होने लगता है जिसको चिकित्सकीय भाषा में हाइड्रोसिफेलस कहते हैं। यह स्थिति मरीज़ के लिए ख़तरनाक हो सकती है।

पहले ब्रेन ट्यूमर का इलाज करना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इस में पाए जाने वाले लक्षण किसी अन्य समस्या के भी संकेत हो सकते थे। बोलते समय अटकना- दवाइयों, नशीले पदार्थों या शराब का सेवन करने के कारण भी हो सकता है। जब यह लक्षण तीव्रता के साथ उत्पन्न होने लगते हैं तो यह ब्रेन ट्यूमर का कारण हो सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर के अन्य लक्षण:

1. सिरदर्द 

2. मानसिक व व्यक्तित्व बदलाव 

3. मास इफेक्ट 

4. फोकल लक्षण।

क्या सभी ब्रेन ट्यूमर में ब्रेन सर्जरी की ज़रूरत होती है?

ब्रेन ट्यूमर के लिए सर्जरी ज़रूरी होती है। ट्यूमर आखिरी स्टेज में न हो तो सर्जरी की आधुनिक विधियों ने इसके इलाज को काफी आसान बना दिया है। माइक्रोसर्जरी, इमेज गाइडेड सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी, इंटराऑपरेटिव मॉनिटरिंग आदि उपाय आज़माए जाते हैं। हालांकि सर्जरी को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसके कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। 

क्या मोबाइल फोन के साथ सोने से ब्रेन ट्यूमर का ख़तरा हो सकता है? 

रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल से भी ज्यादा समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर का ख़तरा 33 प्रतिशत बढ़ जाता है। 


दांतों के दर्द में फायदेमंद होता है लौंग का सेवन

दांतों के दर्द में फायदेमंद होता है लौंग का सेवन

हमारे दांत बहुत ही सेंसिटिव अंग है। कई बार गलत खान-पान या मीठे का ज्यादा सेवन करने से दांतों में तेज दर्द होने लगता है। दांत के दर्द से छुटकारा पाने के लिए लोग हैवी पेनकिलर्स का सेवन करते हैं. जिससे सेहत को बहुत सारे साइड इफेक्ट हो सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं जिनके इस्तेमाल से आपके दांतों में होने वाला दर्द ठीक हो जाएगा।

कैसे करें दांतों के दर्द का इलाज:

नमक का पानी एक नेचुरल कीटाणुनाशक होता है और दांत के दर्द को ठीक करने का सबसे सरल और असरदार नुस्खा है। इसे इस्तेमाल करने के लिए आधा चम्मच नमक को गर्म पानी में मिलाकर माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करें।

लौंग दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। लौंग में भरपूर मात्रा में युजेनॉल होता है जो एक नेचुरल एंटीसेप्टिक है। अगर आपके दांत में दर्द हो रहा है तो एक लौंग को मुंह में रखकर उस का रस चूसें।

अमरूद के पत्तों में भरपूर मात्रा में एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। अमरूद की पत्तियों को चबाने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।

व्हीटग्रास में भरपूर मात्रा में जीवाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं जो दांतों की सड़न और दर्द को रोकने में सहायक होते हैं। व्हीटग्रास को चबाने से दातों में होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।


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