लड़कियों की वैजाइना से क्यों निकलता है सफ़ेद पानी

लड़कियों की वैजाइना से क्यों निकलता है सफ़ेद पानी

अक्सर लड़कियों के प्राइवेट पार्ट यानि वजाइना से सफ़ेद पानी आने लगता है। यह पूरी तरह समान्य होता है और इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती है। क्योंकि, यह समस्या ज्यादातर टीन ऐज की लड़कियों में ज्यादा देखी जाती है। हालाँकि, थोड़ी मात्रा में सफ़ेद पानी का आना किसी बीमारी का संकेत नहीं है।

क्यों होता है योनि स्राव :-

दरअसल महिलाओं में ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा के बहाव को ही योनि स्राव कहा जाता है। यह एक सामान्य सी प्रक्रिया होती है, जो मासिक चक्र के अनुसार समय-समय पर परिवर्तित होती रहती है। महिलाओं में पीरियड्स से पहले और बाद में स्त्राव होना सामान्य सी प्रक्रिया होती है। इसके अलावा अण्डोत्सर्ग के समय पर भी योनि में स्वाभाविक स्त्राव होता है क्योंकि, अंडे को अंदर जाने में सहायता मिल सके।

इससे बचने के क्या उपाय हैं ?

# योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।

# सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें। यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें। सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें। अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।


क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

केरल में कोविड-19 संक्रमण मुद्दे पर राहत भरी समाचार आई है एम्स के प्रोफेसर ने बोला है कि कोविड-19 का ताजा चरम संभावित तौर पर समाप्त हो गया है और संक्रमण के नए मामलों में आनेवाले दो हफ्ते में कमी प्रारम्भ होनी चाहिए डॉक्टर संजय राय ने कहा, "शुरू के केरल में दो सीरो सर्वे से पता चलता है कि ज्यादातर आबादी को खतरा था लेकिन ताजा सीरो सर्वे बताता है कि वैक्सीन के कारण या संक्रमण से 46 फीसद आबादी में एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी है

'केरल में कोविड-19 का चरम संभावित तौर पर खत्म'

राज्य सरकार के किए गए तरीकों से केवल फैलाव कम होता है पिछले 2-3 महीनों में वायरस के फैलाव का डेटा देखा जाए, तो मालूम होता है कि केरल चरम से गुजर चुका है और अगले दो हफ्ते में मामलों की संख्या गिरनी चाहिए ठीक उत्तर-पूर्व की तरह केरल में भी अक्तूबर की आरंभ तक कोविड-19 के मामलों में गिरावट प्रारम्भ होना चाहिए "

'अगले दो हफ्ते में मामलों में भी होने लगेगी कमी'

एम्स जल्द ही हैदराबाद की कंपनी हिंदुस्तान बायोटेक की नैजल वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का मानव परीक्षण प्रारम्भ करेगा और एथिक्स कमेटी की जरूरी स्वीकृति हासिल करने के लिए आवेदन किया गया है डॉक्टर संजय राय हिंदुस्तान बायोटेक की इंट्रानासल वैक्सीन BBV154 क्लीनिकल ट्रायल के प्रिसिंपल इन्वेस्टिगर भी हैं उन्होंने कहा, “कहना है बहुत सरल है लेकिन हमारा मानना है कि भविष्य नैजल वैक्सीन के लिए उत्साहजनक है क्योंकि ये म्यूकोसा की इम्यूनिटी दे सकती है, तब संक्रमण की रोकथाम संभव है

ज्यादातर वैक्सीन संक्रमण को रोक पाने में सक्षम नहीं हैं, वो केवल गंभीरता को कम करती हैं नैजल वैक्सीन एथिकल स्वीकृति के लिए गई है और स्वीकृति मिलने के बाद हम परीक्षण प्रारम्भ करेंगे  बताते चलें कि मानव परीक्षण के चरण में जानेवाली एडेनोवायरल वैक्सीन हिंदुस्तान की पहली Covid-19 वैक्सीन है इस वैक्सीन के डोज लेने के लिए सुई की आवश्यकता नहीं होती बल्कि सुई के बजाए नाक से दी जाती है