महिलाओं के लिए स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है ई-सिगरेट

महिलाओं के लिए स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है ई-सिगरेट

आजकल नई-नई चीजें मार्केट में लांच होती रहती है। ऐसे ही सिगरेट से ज्यादा ई-सिगरेट ज्यादा चर्चा में है। यह सेहत के साथ-साथ दिल को भी नुकसान पहुंचाता है। सामान्य सिगरेट और इ सिगरेट में कुछ खास अंतर नहीं है बल्कि इससे भी शरीर को नुकसान ही होता है।

ई-सिगरेट बना सकती है बाँझ:

प्रेग्नेंट महिलाएं ई-सिगरेट को सेफ मानकर स्मोकिंग के ऑल्टरनेटिव के तौर पर ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में हुई इस स्टडी के लीड ऑथर कैथलीन कैरून ने कहा, हमने अपनी स्टडी में पाया कि गर्भधारण से पहले अगर ई-सिगरेट का इस्तेमाल किया जाए तो फर्टिलाइज्ड भ्रूण का गर्भाशय में इम्प्लांटेशन देर से होता है जिससे फर्टिलिटी घट जाती है।

शोध में हुआ खुलासा:

अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी के दौरान ई-सिगरेट का इस्तेमाल करती है तो इससे होने वाले बच्चे की ग्रोथ, मेटाबॉलिज्म और लॉन्ग टर्म हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है। इस स्टडी को जर्नल ऑफ इन्डोक्राइन सोसायटी में प्रकाशित किया गया है।


क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

केरल में कोविड-19 संक्रमण मुद्दे पर राहत भरी समाचार आई है एम्स के प्रोफेसर ने बोला है कि कोविड-19 का ताजा चरम संभावित तौर पर समाप्त हो गया है और संक्रमण के नए मामलों में आनेवाले दो हफ्ते में कमी प्रारम्भ होनी चाहिए डॉक्टर संजय राय ने कहा, "शुरू के केरल में दो सीरो सर्वे से पता चलता है कि ज्यादातर आबादी को खतरा था लेकिन ताजा सीरो सर्वे बताता है कि वैक्सीन के कारण या संक्रमण से 46 फीसद आबादी में एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी है

'केरल में कोविड-19 का चरम संभावित तौर पर खत्म'

राज्य सरकार के किए गए तरीकों से केवल फैलाव कम होता है पिछले 2-3 महीनों में वायरस के फैलाव का डेटा देखा जाए, तो मालूम होता है कि केरल चरम से गुजर चुका है और अगले दो हफ्ते में मामलों की संख्या गिरनी चाहिए ठीक उत्तर-पूर्व की तरह केरल में भी अक्तूबर की आरंभ तक कोविड-19 के मामलों में गिरावट प्रारम्भ होना चाहिए "

'अगले दो हफ्ते में मामलों में भी होने लगेगी कमी'

एम्स जल्द ही हैदराबाद की कंपनी हिंदुस्तान बायोटेक की नैजल वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का मानव परीक्षण प्रारम्भ करेगा और एथिक्स कमेटी की जरूरी स्वीकृति हासिल करने के लिए आवेदन किया गया है डॉक्टर संजय राय हिंदुस्तान बायोटेक की इंट्रानासल वैक्सीन BBV154 क्लीनिकल ट्रायल के प्रिसिंपल इन्वेस्टिगर भी हैं उन्होंने कहा, “कहना है बहुत सरल है लेकिन हमारा मानना है कि भविष्य नैजल वैक्सीन के लिए उत्साहजनक है क्योंकि ये म्यूकोसा की इम्यूनिटी दे सकती है, तब संक्रमण की रोकथाम संभव है

ज्यादातर वैक्सीन संक्रमण को रोक पाने में सक्षम नहीं हैं, वो केवल गंभीरता को कम करती हैं नैजल वैक्सीन एथिकल स्वीकृति के लिए गई है और स्वीकृति मिलने के बाद हम परीक्षण प्रारम्भ करेंगे  बताते चलें कि मानव परीक्षण के चरण में जानेवाली एडेनोवायरल वैक्सीन हिंदुस्तान की पहली Covid-19 वैक्सीन है इस वैक्सीन के डोज लेने के लिए सुई की आवश्यकता नहीं होती बल्कि सुई के बजाए नाक से दी जाती है