छोटे कद के लोगों को ज्यादा होता है डायबिटीज का खतरा

छोटे कद के लोगों को ज्यादा होता है डायबिटीज का खतरा

आजकल कई लोग डायबिटीज के शिकार होते है। किसी के शरीर की लंबाई अगर सामान्य से कम है तो वैसे भी उसे समाज में थोड़ी समस्या और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब एक नये शोध में पता चला है कि जिन लोगों की लंबाई सामान्य से कम होती है उनके लिए सेहत के लिहाज से भी कम परेशानी नहीं होती है। इन लोगों को डायबिटीज का तो खतरा होता ही है साथ ही इन बीमारियों के होने का भी भय बना रहता है।

डायबिटीज का खतरा:

नये शोध में इस बात का पता चला है कि लंबे लोगों की तुलना में कम लंबाई वालों को टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा होता है। अध्ययन के अनुसार औसतन अगर किसी की लंबाई 10 सेंटीमीटर ज्यादा बढ़ गई है तो उसमें डायबिटीज का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

शोध में हुआ खुलासा:

महिलाओं में जहां लंबाई के 10 सेंटीमीटर बढ़ने से ये खतरा मात्र 33 प्रतिशत कम होता है वहीं पुरुषों में लंबाई बढ़ने से 41 प्रतिशत तक खतरा कम हो जाता है।

लंबे पैर देखने में जितने आकर्षक होते हैं स्वास्थ्य के लिए भी उतने ही बढ़िया होते हैं। जिन पुरुषों या महिलाओं के पैर धड़ की अपेक्षा ज्यादा लंबे होते हैं उनमें डायबिटीज का खतरा उतना कम होता है।


क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

क्या केरल में कोविड-19 का चरम गुजर चुका है? नए मामलों पर एम्स प्रोफेसर ने कही ये बात

केरल में कोविड-19 संक्रमण मुद्दे पर राहत भरी समाचार आई है एम्स के प्रोफेसर ने बोला है कि कोविड-19 का ताजा चरम संभावित तौर पर समाप्त हो गया है और संक्रमण के नए मामलों में आनेवाले दो हफ्ते में कमी प्रारम्भ होनी चाहिए डॉक्टर संजय राय ने कहा, "शुरू के केरल में दो सीरो सर्वे से पता चलता है कि ज्यादातर आबादी को खतरा था लेकिन ताजा सीरो सर्वे बताता है कि वैक्सीन के कारण या संक्रमण से 46 फीसद आबादी में एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी है

'केरल में कोविड-19 का चरम संभावित तौर पर खत्म'

राज्य सरकार के किए गए तरीकों से केवल फैलाव कम होता है पिछले 2-3 महीनों में वायरस के फैलाव का डेटा देखा जाए, तो मालूम होता है कि केरल चरम से गुजर चुका है और अगले दो हफ्ते में मामलों की संख्या गिरनी चाहिए ठीक उत्तर-पूर्व की तरह केरल में भी अक्तूबर की आरंभ तक कोविड-19 के मामलों में गिरावट प्रारम्भ होना चाहिए "

'अगले दो हफ्ते में मामलों में भी होने लगेगी कमी'

एम्स जल्द ही हैदराबाद की कंपनी हिंदुस्तान बायोटेक की नैजल वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का मानव परीक्षण प्रारम्भ करेगा और एथिक्स कमेटी की जरूरी स्वीकृति हासिल करने के लिए आवेदन किया गया है डॉक्टर संजय राय हिंदुस्तान बायोटेक की इंट्रानासल वैक्सीन BBV154 क्लीनिकल ट्रायल के प्रिसिंपल इन्वेस्टिगर भी हैं उन्होंने कहा, “कहना है बहुत सरल है लेकिन हमारा मानना है कि भविष्य नैजल वैक्सीन के लिए उत्साहजनक है क्योंकि ये म्यूकोसा की इम्यूनिटी दे सकती है, तब संक्रमण की रोकथाम संभव है

ज्यादातर वैक्सीन संक्रमण को रोक पाने में सक्षम नहीं हैं, वो केवल गंभीरता को कम करती हैं नैजल वैक्सीन एथिकल स्वीकृति के लिए गई है और स्वीकृति मिलने के बाद हम परीक्षण प्रारम्भ करेंगे  बताते चलें कि मानव परीक्षण के चरण में जानेवाली एडेनोवायरल वैक्सीन हिंदुस्तान की पहली Covid-19 वैक्सीन है इस वैक्सीन के डोज लेने के लिए सुई की आवश्यकता नहीं होती बल्कि सुई के बजाए नाक से दी जाती है