कोरोना वायरस ने इस तरह बढ़ाई स्त्रियों की परेशानी, ऐसे करे उपचार

कोरोना वायरस ने इस तरह बढ़ाई स्त्रियों की परेशानी, ऐसे करे उपचार

हर वर्ष 11 जुलाई को दुनिया जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य संसार में तेजी से बढ़ती आबादी की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करना होता है। इस बार संसार कोरोना महामारी की गिरफ्त में है।

 ऐसे में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने वर्ष 2020 की दुनिया जनसंख्या दिवस की थीम में महिला स्वास्थ को जोड़ा है। यूएन ने इसका शीर्षक, ‘कोविड-19 की रोकथाम: स्त्रियों व लड़कियों के स्वास्थ और अधिकारों की सुरक्षा कैसे हो’। यूएन इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्त्रियों से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव पड़ा है। यूनाइटेड नेशन्स पॉप्युलेशन फंड (यूएनपीएफ) के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण स्त्रियों के स्वास्थ से जुड़े मुद्दों से ध्यान हट गया है। न केवल दुनियाभर की स्त्रियों के लिए नियमित यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई हैं, बल्कि महिला स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र व विभिन्न सरकारों के कार्यक्रमों पर भी प्रभाव पड़ा है।

myUpchar से जुड़े एम्स के डाक्टर अजय मोहन बताते हैं कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर देखा गया है, जिनकी इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता निर्बल है। गर्भावस्था व नवजात शिशुओं में इसका खतरा अधिक है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस व लॉकडाउन के दौर में स्त्रियों को दोहरी कठिनाई से जूझना पड़ रहा है। एक तरफ उन्हें खुद को इस महामारी से बचना है, वहीं गर्भवती या नवजात शिशु होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना भी करना है। अधिकतर राष्ट्रों ने अपने स्वास्थ संसाधन पूरी तरह से कोरोना की रोकथाम में झोंक दिए हैं। गर्भवती या अभी-अभी मां बनी स्त्रियों के लिए लॉकडाउन में घर से बाहर निकलना या कोरोना काल में अस्पताल जाना भी खतरे से खाली नहीं है। जिन स्त्रियों ने इस दौरान अस्पताल में नवजात शिशु को जन्म दिया, उनकी सांसें भी हमेशा फूली रहीं। सुरक्षित यौन संबंधों के लिए गर्भनिरोधक साधनों का अभाव, परिवार नियोजन, घरेलू हिंसा, एचआईवी एड्स का खतरा, ऐसे मामले रहे, जिनका सबसे अधिक प्रभाव स्त्रियों पर पड़ा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया ऐसे में क्या करें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने समय-समय पर गाइडलाइन जारी कर बताया है कि ऐसे दशा में क्या किया जा सकता है। प्रभावित राष्ट्रों से बोला गया है कि वे कोरोना वायरस की रोकथाम के साथ ही सामान्य स्वास्थ सेवाओं व अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान दें। वहीं स्त्रियों से विशेष तौर पर अपील की है कि वे कोरोना वायरस व लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह पालन करें व अपने बच्चों का भी ख्याल रखें। महिलाएं अपने नवजात शिशुओं को नियमित रूप से स्तनपान करवाएं, ताकि उनकी इम्युनिटी बढ़े। गर्भनिरोधकों का ठीक ढंग से प्रयोग करें। घरेलू हिंसा से खुद को बचाएं, क्योंकि इसका मानसिक प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है।

myUphar से जुड़े डाक्टर विशाल मकवाना के अनुसार, स्त्रियों को शारीरिक संबंध बनाने से लेकर प्रेग्नेंट होने व नवजात शिशु को जन्म देने तक अपने शरीर के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का भी बहुत ख्याल रखना होता है।

कोरोना काल में नहीं मिल रहे पोषक तत्व
मेडिकल जर्नल लांसेंट ने अपने अध्ययन में पाया है कि कोरोना वायरस के काल में 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं व उनकी माताओं की मौत के ज्यादा मुद्दे सामने आए हैं, क्योंकि इस दौर में उन्हें पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं व पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं। कोरोना काल के 6 महीनों में शिशुओं की मौत के 2,53,500 और माताओं की मौत के 12,200 अलावा मुद्दे सामने आए हैं। इस तरह महिलाएं इस कठिन समय में अपना व नवजात का विशेष ख्याल रखें। किसी तरह की संभावना हो तो तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करें। परिवार के अन्य मेम्बर भी स्त्रियों पर विशेष ध्यान दें व उनकी मदद करें।