स्टडी में दावा- दिनभर बैठे रहने से होने वाली खतरनाक समस्या , इसे टाला जा सकता है एक्सरसाइज से...

स्टडी में दावा- दिनभर बैठे रहने से होने वाली खतरनाक समस्या , इसे टाला जा सकता है एक्सरसाइज से...

हम में से कई लोग ऑफिस, कॉलेज, शॉप या किसी भी काम के सिलसिले में लगातार बैठते होंगे। लगातार बैठकर काम करने से आपकी हेल्थ पर असर पड़ता है। कोरोना के समय लगे प्रतिबंध, वर्क फ्रॉम होम में लोग सामान्य से ज्यादा लगातार बैठकर काम कर रहे हैं।

अमेरिका में हाल ही में हुई एक स्टडी में दावा किया गया है कि अगर एक दिन में सिर्फ 11 मिनट पैदल चलते या टहलते हैं तो यह आपको कई तरह की परेशानियों से बचाता है। यह स्टडी 10 हजार लोगों पर की गई। इसमें हर एक व्यक्ति से पूछा कि उसने अपना पूरा दिन कैसे बिताया?

इसमें पाया गया कि जो लोग बिल्कुल नहीं चलते उनमें कम उम्र में मरने का जोखिम ज्यादा रहता है। साथ ही जो लोग थोड़ा बहुत भी घूमते हैं, उन पर इस तरह का कोई जोखिम कम हो जाता है। एक सर्वे में सामने आया है कि पिछले साल की तुलना में कोरोना के समय लोगों में एक्सरसाइज की आदत कम हुई और बैठे रहने की आदत बढ़ी है।

बैठे रहने से होने वाले जोखिम से अच्छा है एक्टिव रहें

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक बैठे रहने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। मोटापा, ब्लड प्रेशर और बैक पेन तो बहुत ही आम है। अगर आप आठ घंटे बैठे रहकर काम करते हैं, तो शाम के वक्त आधा घंटा जरूर टहलें। इससे फैट बर्न होता है और ब्लड प्रेशर समेत शरीर की कई चीजें सामान्य रहती है।
  • 2016 में हुई एक रिसर्च का दावा है कि बैठे रहने से होने वाले असर से बचने के लिए कम से कम 60 से 75 मिनट एक्सरसाइज करें। यह रिसर्च एक मिलियन से ज्यादा लोगों पर की गई थी।
  • रिसर्च में पाया गया कि ज्यादातर लोग ज्यादा बैठने के बाद भी एक्सरसाइज पर ध्यान नहीं देते। जिसके चलते मोटापा और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
  • फिट और एक्टिव रहने के लिए एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। अगर आप इसके लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो कम ही सही लेकिन एक्सरसाइज हर सूरत में फायदेमंद है।

साइंटिस्टों का क्या कहना है?

  • वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अपडेटेड फिजिकल गाइडलाइन को लेकर की गई एक स्टडी पिछले हफ्ते ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सरसाइज को लेकर लोग बहुत गंभीर नहीं हैं। इसलिए पहले की रिसर्च में सामने आई बातों के मद्देनजर सुझाई गई जरूरी एक्सरसाइज को करना चाहिए।
  • वैज्ञानिकों ने पिछली स्टडी को एनलाइज किया। उन्होंने पाया कि इसमें 50 हजार लोगों को शामिल किया गया था। पिछली स्टडी के परिणामों को एनलाइज करते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि इस स्टडी में शामिल 50 हजार लोगों में से ज्यादातर लोग एक दिन में औसतन 10 घंटे बैठने वाले थे। जो जरूरत पड़ने पर ही अपनी जगह से 2 से 3 मिनट के लिए उठते थे।
  • इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों ने दिन में 11 मिनट भी एक्सरसाइज की, उनमें समय से पहले मरने का खतरा कम था। भले ही वह ऐसे लोगों में शामिल थे, जो कम चले या बैठे रहे।
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आप दिन में 35 मिनट भी एक्सरसाइज या घूमने के लिए समय निकालते हैं, तो यह फायदेमंद है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने घंटे बैठे रहे हैं?
  • हालांकि यह स्टडी ऑब्जर्वेशन पर आधारित थी। इसमें बस फिजिकल एक्टिविटी, बैठे रहना और मृत्यु दर को जोड़ा गया।

थोड़ा चलना भी फायदेमंद साबित हो सकता है

  • नार्वे स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स साइंसेस के एपिडेमोलॉजी और फिजिकल एक्टिविटी के प्रोफेसर उल्फ एकेलुंड का कहना कि पूरे दिन बैठे रहने वाले लोगों को थोड़ा-बहुत उठकर चलना चाहिए। थोड़ा चलना भी एक अच्छी एक्सरसाइज है। आधा घंटे या उससे कम एक्सरसाइज हमारी लाइफ और उम्र को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

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कोरोना ने बड़ी संख्या में लोगों को दिमागी तौर पर बीमार किया है। यही वजह है कि अब सरकारें लोगों को इससे उबारने के लिए आगे आ रही हैं। अमेरिका के बाद ब्रिटेन की एजेंसी पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने लोगों को दिमागी बीमारी से निजात पाने के तरीके बताए हैं। फोकस लाइफ-स्टाइल पर है।

एजेंसी का कहना है कि यदि आप मानसिक परेशानियों से बचना चाहते हैं तो लाइफ-स्टाइल में बदलाव जरूर करें।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने मानसिक समस्याओं से निपटने के 8 तरीके बताए

1. डेली रूटीन पर काम करें

हमें डेली रूटीन को बहुत ज्यादा तरजीह देनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले इसके बारे में गंभीरता से सोचें। फिर ऐसा डेली रूटीन प्लान बनाएं, जो हमें पॉजिटिव रखे। आमतौर पर डेली रूटीन हमारे काम के हिसाब से होता है। यह अप्रोच गलत है। काम जरूरी है, लेकिन हेल्थ उससे ज्यादा जरूरी है। फोकस इस बात पर करें कि दिनभर में कितना समय खुद को दे रहे हैं?

इसलिए दिन की शुरुआत एक्सरसाइज से करें और हेक्टिक शेड्यूल में रिफ्रेश, रेस्ट और पॉजिटिव महसूस करने के लिए ब्रेक जरूर लें।

2. अपनों से जुड़े रहें

मानसिक समस्याओं की सबसे बड़ी वजहों में से एक अपनों से दूर हो जाना भी है। एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर वर्किंग लोगों के पास अपनों के लिए वक्त नहीं है। ये दूरी मानसिक शांति यानी मेंटल पीस को खत्म कर देती है। इसलिए अपनों से कनेक्ट रहने की कोशिश करें। इसके लिए सोशल मीडिया और वीडियो चैट का सहारा भी ले सकते हैं।

3. दूसरों की मदद करें

आसपास के लोगों की मदद करने के बारे में सोचें। इससे दूसरों को फायदा होगा और आपको भी अच्छा महसूस होगा। हमें दूसरों की समस्याओं और चिंताओं को सुनना और समझना चाहिए। इससे आपको निगेटिव फीलिंग नहीं आएगी। आप आशावादी होंगे, अकेलेपन और एंग्जाइटी से भी उबर पाएंगे।

4. अपनी चिंताओं के बारे में बात करें

महामारी जैसे हालात में चिंता, डर और असहाय महसूस करना बहुत सामान्य है। हर किसी ने इसे अनुभव भी किया होगा। स्टडी में पता चला है कि तनाव साझा करने से मानसिक दबाव आधे से ज्यादा कम हो जाता है। समस्याएं शेयर करने से सुझावों का आदान-प्रदान होता है। इससे भी तनाव कम होता है। इसलिए समस्याओं को शेयर करने में संकोच न करें।

5. फिजिकल हेल्थ पर ध्यान दें

आप मानसिक तौर पर कैसा महसूस कर रहे हैं, यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है। इसलिए फिजिकल हेल्थ पर जरूर फोकस करें। आप घर पर सेल्फ-चेकअप के लिए बेसिक चीजें जैसे थर्मामीटर, बीपी मशीन और फर्स्ट-एड किट रख सकते हैं।

6. स्मोकिंग, ड्र्ग्स और अल्कोहल छोड़ने के लिए मदद लें

ड्रग्स, अल्कोहल और स्मोकिंग की लत भी मानसिक समस्या है। इससे डिप्रेशन में खुदकुशी का रिस्क भी होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए किसी ऐसे साथी से सपोर्ट मांगे, जो आपकी आदतों पर नजर रखे और लत से रोके।

यह ऐसी आदत है, जिसे तलब के चलते आप छोड़ नहीं पाते। ऐसे में दूसरों के प्रति जवाबदेह बनना कारगर तरीका है।

7. पूरी नींद लें

न सोना या कम सोना भी मानसिक बीमारी की वजह बन सकता है। बिस्तर पर जाने के बाद सोचना, चिंता करना, तनाव में रहना और मोबाइल यूज करना गलत है। यह स्लीप टाइम को कम कर देता है। इससे लोग इनसोम्निया के शिकार हो जाते हैं, ये भी मानसिक बीमारी है।

अच्छी और पूरी नींद लेने से मानसिक बीमारियों का जोखिम 50% तक कम हो जाता है। इसलिए अच्छी नींद की आदत डालें।

8. वह काम करें, जो अच्छा लगता हो

जब आप अकेलापन, एंग्जाइटी या तनाव महसूस कर रहे हों तो उसमें ज्यादा न उलझें। इसे जितना महसूस करेंगे, उतना परेशान होंगे। ऐसी स्थिति में आप अपना पसंदीदा काम करें, जैसे- कोई फेवरेट हॉबी, कुछ नया सीखने की कोशिश करें। इससे आप तनाव को कम करने में सफल हो जाएंगे।

एंग्जाइटी दुनिया की सबसे बड़ी मानसिक समस्या

मानसिक बीमारी से जुड़ी हजारों समस्याएं हैं। एंग्जाइटी ऐसी बीमारी है जो दुनिया के 3.76% मानसिक पीड़ितों में है। दूसरे नंबर पर डिप्रेशन है, जो दुनिया के 3.44% मानसिक पीड़ितों में है। तीसरे नंबर पर एल्कोहल यूज डिसऑर्डर है। आप सोच रहे होंगे कि शराब और ड्रग्स का लेना क्या कोई मानसिक समस्या है? हम पहले भी इससे जुड़ी एक खबर कर चुके हैं। भोपाल में साइकेट्रिस्ट सत्यकांत त्रिवेदी के मुताबिक ड्रग्स की लत एक मानसिक बीमारी है।


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