बिहार में अंखफोड़वा कांड, गया में बदमाशों ने युवक की पीटकर हत्या करने के बाद आंख भी फोड़ डाला

बिहार में अंखफोड़वा कांड, गया में बदमाशों ने युवक की पीटकर हत्या करने के बाद आंख भी फोड़ डाला

गया जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के पवरलडीह गांव के टोला अंबेडकर नगर में मंगलवार को 35 वर्षीय युवक की बदमाशों ने पीट-पीटकर निर्मम तरीके से हत्या कर शव को पैमार नदी में फेंक दिया। पुलिस ने  शव की पहचान उसी गांव के राजेश मांझी के रूप में की है। हत्या करने के उपरांत बदमाशों ने राजेश मांझी के एक आंख को भी फोड़ दिया। घटना की जानकारी पर पुलिस घटनास्थल पहुंची। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज भेज दिया। जहां से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया गया।

सोमवार की दोपहर से घर से गायब था राजेश

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार राजेश दूसरे राज्य में ईंट-भट्ठा पर काम करता था। बरसात के मौसम में वह घर आया हुआ था। सोमवार की दोपहर से घर से बाहर करीबियों के साथ निकला था। देर रात तक जब वह वापस घर नहीं लौटा तो स्वजन व्याकुल हो गये। उसकी खोजबीन में टोला के अलावा आसपास के गांव में खाक छानी पर उसे सफलता नहीं मिल सकीं। वहीं, मंगलवार की अल सुबह गांव के कुछ लोग शौच के लिए पैमार नदी की ओर पहुंचे। देखा कि एक युवक का शव पड़ा हुआ है। ग्रामीणों की इसकी पहचान राजेश मांझी के रूप में किया। इसकी सूचना स्वजन व ग्रामीणों को दी। सूचना पर ग्रामीण घटनास्थल पहुंचे।


टोला से कुछ ही दूरी पर हीं घटना स्थल

पैमार नदी यानि घटनास्थल से अंबेडकर नगर की दूरी महज दो सौ मीटर है। स्वजनों को आशंका है कि हत्या में आसपास के लोग भी  शामिल हो सकते हैं। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार राजेश के शरीर पर चोटे के कई निशान भी मिल रहे हैं। बदमाशों ने निर्मम तरीके से उसकी एक आंख को भी फोड़ दिया।

घटनास्थल पर फतेहपुर थाना की पुलिस पहुंची। मृतक राजेश मांझी की पत्नी ने हत्या में कुछ लोगों क नाम शक के आधार पर शामिल होने की बात कही है। पूछताछ के क्रम में पता चला कि राजेश गांव के तीन लोगों के साथ सोमवार को देखा गया था। वैसे लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।


बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) फिर से जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई कर सकेंगे। वे किसी विवादित जमीन के बारे में यह तय करेंगे कि इसका वास्तविक मालिक कौन है। इसे टाइटिल सूट या स्वत्ववाद कहते हैं। करीब आठ साल से चल रहे अदालती विवाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद डीसीएलआर को यह अधिकार मिल गया है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिया है। 

मालूम हो कि बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 के जरिए डीसीएलआर को भूमि विवाद की सुनवाई करने का अधिकार दिया गया था। व्यवहार न्यायालयों से यह अधिकार वापस ले लिया गया था। इस अधिनियम को महेश्वर मंडल नामक रैयत ने 2013 में पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट में पांच साल तक सुनवाई चली। हाई कोर्ट ने 2018 में आदेश दिया कि डीसीएलआर टाइटिल सूट  की सुनवाई नहीं करेंगे। इस पर अमल करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नवम्बर 2018 में आदेश जारी कर डीसीएलआर को अदालती सुनवाई करने से रोक दिया। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विभाग सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को स्थगित कर दिया, जिससे डीसीएलआर को सुनवाई से रोका गया था। राजस्व विभाग ने गुरुवार को कहा कि वह नवम्बर 2019 के अपने आदेश को वापस ले रहा है, जिसके जरिए डीसीएलआर को सुनवाई करने से रोका गया था।  अब डीसीएलआर रैयती मामलों से संबंधित वादों की सुनवाई शुरु करेंगे। वे पूर्व के मामलों में पारित आदेशों का कार्यान्वयन भी करेंगे। 


इन मामलों की होगी सुनवाई

अतिक्रमण, अनाधिकृत संरचना निर्माण, सीमा विवाद, आवंटित बंदोबस्तधारी की बेदखली, भूखंड का विभाजन, सर्वे नक्शा सहित स्वामित्व के अभिलेख में दर्ज विवरण में संशोधन। राजस्व विभाग के ताजा आदेश के बाद इन मामलों की सुनवाई अब व्यवहार न्यायालयों में नहीं होगी।